
Bhojshala Temple-Kamal Maula Mosque Dispute: मध्य प्रदेश के भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने साफ कहा कि इस मामले में सभी पक्षों की आपत्तियों और वीडियोग्राफी को देखकर हाईकोर्ट फैसला करे। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि सर्वे रिपोर्ट और उस पर दी गई आपत्तियों पर हाईकोर्ट सही समय पर विचार करेगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि वीडियोग्राफी में जो भी आपत्तियां दर्ज हुई हैं, उन्हें भी नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
बिना अनुमति की हुई खुदाई
मस्जिद पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने कहा कि सर्वे के दौरान बिना अनुमति खुदाई की गई और पूरी वीडियोग्राफी उन्हें दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे सच्चाई सामने आ सकती है। इस पर कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट को निर्देश दिया जा सकता है कि वह इन आपत्तियों को देखे और उसी के आधार पर फैसला ले।
सरकार की ओर से पेश हुए ये लोग
सरकार की ओर से केएम नटराज और विष्णु शंकर जैन पेश हुए। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने किसी मांग को खारिज नहीं किया है, बल्कि अंतिम सुनवाई के समय इन मुद्दों पर विचार होगा। यह विवाद भोजशाला परिसर की धार्मिक पहचान को लेकर है। हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। इस स्थल का सर्वे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा किया गया है।
कब होगी अगली सुनवाई?
इससे पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को अपनी अंतिम आपत्तियां देने को कहा था और 2 अप्रैल 2026 को अगली सुनवाई तय की है। कोर्ट ने यह भी कहा कि वह खुद इस स्थल का निरीक्षण कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कोई अंतिम राय नहीं दी है और सभी मुद्दों को खुला रखा है। अब सभी की नजरें हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, जो इस लंबे समय से चल रहे विवाद में अहम भूमिका निभाएगा।
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