इन दवाइयों ने ली कई मासूमों की जान, रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा

इन दवाइयों ने ली कई मासूमों की जान, रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा

नई दिल्ली: आज के समय में लोग अपने छोटी-मोटी बीमारियोंखुद से दवाईयों का सेवन कर लेते है, जिसका नतीजा कई बार खतरनाक भी होता है। वहीं साल 2019 में लगभग 50 लाख लोगों की मौत हुई थी। मौतों का यह आंकड़ा 2020 में कोरोना से हुई मौतों का लगभग दोगुना है।इसके साथ इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एक स्टडी की गई, जिसमें कई बातों का खुलासा किया गया।

बता दें कि, द लैंसेट दुनिया का एक प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल है जो दवाओ पर तमाम रिसर्च करता है। रिसर्च के मुताबिक ज्यादा एंटीबायोटिक खाने से उसका शरीर पर असर कम होने लगता है। वहीं इस में खासतौर पर एजिथ्रोमाइसिन का जिक्र किया गया है। जिसे टॉफियों की तरह हर घर में बिना डॉक्टरी परामर्श के इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा आपको लगता होगा कि मेडिकल स्टोर पर जो दवा मिल रही है वो सही ही होगी क्योंकि सरकार से मंजूरी के बिना तो दवा बिकती नहीं, अगर आप ऐसा सोचते है तो ये बिल्कुल गलत है। इसके अलावा द लैंसेट की रिपोर्ट का दावा है कि भारत में अधिकतर एंटीबायोटिक दवाएं तो बिना सेंट्रल ड्रग रेगुलेट की मंजूरी के बिक रही हैं। रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि भारत में एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल संतुलित तरीके से नहीं किया जाता। यानी, लोग मेडिकल स्टोर पर जाते हैं और एंटीबायोटिक खरीद लेते है।

ये आंकड़े देखिए खुद ही चौंक जाएंगे

- साल 2000 से 2010 के बीच एंटीबोयोटिक की खपत दुनियाभर में 36 प्रतिशत बढ़ी है।

- 2019 में कुल दवाओं में 77.1 प्रतिशत एंटीबायोटिक बिकीं।

- जितनी भी एंटीबायोटिक दुनिया में बेची गईं, उनमें से 72.1 प्रतिशत एप्रूव ही नहीं थी।

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