भारत का वो अनोखा गांव, जहां किसी व्यक्ति को दो मंजिला घर बनाने की नहीं हैं अनुमति

भारत का वो अनोखा गांव, जहां किसी व्यक्ति को दो मंजिला घर बनाने की नहीं हैं अनुमति

Ajab-gajab: भारत में आज भी बहुत बड़ी आबादी में लोग गांव में रहना पसंद करते है। हालांकि ज्यादातर गांव में शहर जैसी कई सुविधा दी जाने लगी है। वहीं भारत के कई गांव किसी-ना-किसी वजह से दुनियाभर में मशहूर है। आज आपको उनमें से एक गांव के बारे में बताने जा रहे है। जहां गांव का कोई भी व्यक्ति दो मंजिला घर का निर्माण नहीं करवा सकता है और अगर कोई ऐसा करता है तो उसके घर को नुकसान हो जाता है। अब इसके पीछे क्या वजह है चलिए आपको बताते है।

इस गांव में दूसरी मंजिला घर नहीं बना सकते

गांव में बने हर घर को नींव से उठाकर दीवारों के साथ छत तक निर्माण किया जाता है। गांव के लोगों के मुताबिक, छत के ऊपर किसी प्रकार का निर्माण करना पूरी तरह से मना है। इसकी वजह गांव में बना माता जयंती देवी का मंदिर बताया जाता है। दरअसल प्राचीन काल में बाबर के शासन के दौरान एक हिंदू राजपूत हथनौर का राजा था। इनमें से एक भाई की कांगड़ा के राजा की बेटी से शादी हुई थी। राजकुमारी माता जयंती देवी की बहुत बड़ी भक्त थीं। वह हर दिन माता की पूजा और दर्शन के बाद ही जलपान करती थीं।

माता ने नहीं दी घर बनाने की अनुमति

एक दिन राजकुमारी ने माता से कहा कि माता मैं आपके बिना इतनी दूर कैसे रहूंगी। माता ने राजकुमारी के सपने में आकर उसे आश्वासन दिया कि बेटी तुम्हारी डोली तभी उठेगी जब मेरी डोली तुम्हारे साथ उठेगी। शादी के बाद डोली नहीं उठ पाने की वजह से सभी चिंतित हो गए। इसके बाद माता जयंती की डोली भी सजाई गई।  हथनौर के राजा के साथ राजकुमारी और माता की डोली विदा हुई। राजा ने पुजारी को भी साथ भेज दिया। अभी तक माता जयंती की पूजा उसी वंश के पुजारी करते आ रहे हैं। जब कुछ सालों के बाद राजा और रानी की मौत हो गई, तो उसके बाद अगली पीढ़ियों ने माता की पूजा बंद कर दी।

सालों से माता का प्रकोप झेल रहा गांव

वहीं उस दौरान मनी माजरा के जंगलों में एक डाकू रहता था, जो माता जयंती देवी का बहुत बड़ा उपासक था। माता ने डाकू को दर्शन दिए और जयंती नदी के किनारे माता की मूर्ति स्थापित करने की बात कही। लेकिन रानी के अगली पीढ़ियों ने माता की पूजा बंद कर दी, तो माता ने डाकू के सपने में आकर निर्देश दिया कि वह इस रियासत को तबाह कर दे। इसके बाद से ही माता के प्रकोप से बचने के लिए आज भी घरों के ऊपर दूसरी मंजिल नहीं बनाई जाती है। अगर कोई घर के ऊपर दूसरी मंजिल बनाने की कोशिश करता है, उसके साथ कोई अनहोनी हो जाती है।

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