भारत की तीनों सेनाएं कैसे खुद को लंबे युद्ध के लिए तैयार करेंगी? राजनाथ सिंह ने बताया 5 Year War का प्लान

भारत की तीनों सेनाएं कैसे खुद को लंबे युद्ध के लिए तैयार करेंगी? राजनाथ सिंह ने बताया 5 Year War का प्लान

5Year War Plan: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में मध्य प्रदेश के महू में आयोजित 'रण संवाद 2025' कार्यक्रम में भारतीय सशस्त्र बलों को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज की अनिश्चित भू-राजनीतिक स्थिति में युद्ध अप्रत्याशित और लंबे हो सकते हैं। इसलिए, भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना को छोटे संघर्षों से लेकर पांच साल तक चलने वाले युद्धों के लिए तैयार रहना होगा। यह बयान ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद आया, जिसमें भारत ने स्वदेशी हथियारों की ताकत का प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को नष्ट किया था।

पांच-वर्षीय युद्ध लक्ष्य का महत्व

वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में रूस-यूक्रेन युद्ध और इजरायल-हमास संघर्ष जैसे लंबे संघर्षों ने यह दिखाया है कि युद्ध की अवधि का अनुमान लगाना मुश्किल है। इसके अलावा भारत के सामने चीन के साथ सीमा विवाद और पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद जैसी चुनौतियां हैं। इस मुद्दे पर राजनाथ सिंह ने जोर दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा अब केवल सैन्य शक्ति का विषय नहीं, बल्कि 'पूरे राष्ट्र का दृष्टिकोण' है।

भारत किसी की जमीन पर कब्जा नहीं करना चाहता, लेकिन अपनी क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए तीनों सेनाओं को आत्मनिर्भरता, संयुक्तता और आधुनिक तकनीक पर ध्यान देना होगा।

तीनों सेना की तैयारी कैसी होनी चाहिए?

1. भारतीय सेना 1.4 मिलियन सैनिकों के साथ दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सेना है। जिन्हें एक लंबे युद्ध के लिए तैयारियां करनी होंगी। जैसे लंबे युद्ध के लिए कम से कम 30-40 दिनों का गोला-बारूद और हथियारों का भंडारण जरूरी है। वर्तमान में भारत के पास 10-15 दिनों का स्टॉक है। स्वदेशी हथियार जैसे धनुष तोप, ATAGS, ब्रह्मोस, और पिनाका मिसाइलों का उत्पादन बढ़ाना होगा। अग्नि-5 जैसे बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण और तैनाती भी जरूरी है।

इसके अलावा थिएटर कमांड के तहत सेना को नौसेना और वायुसेना के साथ संयुक्त अभ्यास बढ़ाने होंगे। साइबर युद्ध, ड्रोन युद्ध, और AI प्रशिक्षण पर जोर देना होगा। साथ ही, रक्षा खरीद का 75% बजट स्वदेशी हथियारों पर खर्च किया जाएगा। कावेरी इंजन और AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) जैसे प्रोजेक्ट्स को तेज करना होगा।

2. भारतीय नौसेना को समुद्री सीमाओं का संरक्षणहिंद महासागर में चीन की बढ़ती उपस्थिति को देखते हुए 'ब्लू वाटर नेवी' बनने की दिशा में काम करना होगा। इसके अलावा 2025 तक 200 युद्धपोतों का लक्ष्य है (वर्तमान में 150)। INS उदयगिरी और हिमगिरी जैसे स्टेल्थ फ्रिगेट्स को शामिल किया जाएगा। INS अरिहंत और स्कॉर्पीन-क्लास पनडुब्बियों को अपग्रेड करना होगा। 2030 तक 5 परमाणु पनडुब्बियां तैनात करने की योजना है।

इसी के साथ लंबे युद्ध के लिए 6 महीने का ईंधन भंडार और चालक दल प्रशिक्षण जरूरी है। सैटेलाइट-आधारित नेविगेशन और साइबर डोमेन में नौसेना की भागीदारी बढ़ानी होगी। ब्रह्मोस, निर्भय क्रूज मिसाइलें, और S-400 सिस्टम से नौसेना को लैस करना होगा। चीन की 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' रणनीति का मुकाबला करने के लिए QUAD (भारत, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया) के साथ संयुक्त गश्त बढ़ानी होगी।

3. भारतीय वायुसेना को अपनी स्क्वाड्रन संख्या को 42 तक बढ़ाने की जरूरत है। तेजस Mk-1A, राफेल और AMCA स्टेल्थ फाइटर की खरीद बढ़ानी होगी। साल 2025 तक 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) का फैसला लिया जाएगा। MQ-9B ड्रोन और स्वदेशी ड्रोन (DRDO) की तैनाती बढ़ानी होगी।

हवाई रक्षा और मिसाइल: S-400, MRSAM, और आकाश मिसाइल सिस्टम को एकीकृत करना होगा। इसके अलावा पायलटों को AI, हाइपरसोनिक और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रशिक्षण देना होगा। थिएटर कमांड के तहत सेना और नौसेना के साथ समन्वय बढ़ाना होगा। HAL और DRDO से कावेरी जेट इंजन विकसित करना होगा।  

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