
Afzal Ansari Get Relif: उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से एक बड़ी खबर सामने आई है। गाजीपुर के सांसद व सपा नेता अफजाल अंसारी को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। पूर्व विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड मामले में गाजीपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने अफजाल अंसारी को 4 साल की सजा सुनाई थी। जिसके बाद उनकी संसदीय सदस्यता खतरे में आ गई थी। हालांकि, हाई कोर्ट के फैसले के बाद अफजाल अंसारी अब सांसद बने रहेंगे। गौरतलब है कि, 29 नवंबर 2005 में विधायक कृष्णानंद राय की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में अफजाल अंसारी के भाई और बाहुबली मुख्तार अंसारी को सजा हुई थी। हालांकि, मुख्तार अंसारी की मौत कुछ ही महीने पहले जेल में हो गई थी।
हाई कोर्ट ने पहले सजा पर रोक लगाने से किया था इंकार
पूर्व विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड मामला में सासंद अफजाल अंसारी को गौंगस्टर एक्ट के तहत 4 साल की सजा सुनाई गई थी। गाजीपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने यह फैसला 29 अप्रैल 2023 को सुनाई थी। अब हाई कोर्ट ने अफजाल अंसारी के द्वारा दायर की गई अपील को मंजूर कर लिया है। वहीं, राज्य सरकार और कृष्णानंद राय के बेटे पीयूष राय द्वारा अफजाल अंसारी की सजा बढ़ाने वाली याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी है। गौरतलब है कि विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड में मुख्तार अंसारी, अफजाल अंसारी और एजाजुल हक पर गौंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से हाई कोर्ट ने इंकार कर दिया था। अफजाल अंसारी इसके बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। जहां सुप्रीम कोर्ट ने अफजाल अंसारी की सजा पर तत्काल रोक लगा कर हार्इ कोर्ट को 30 जून तक इस मामले में सुनवाई खत्म करने को कहा था।
जब विधायक के गाड़ी पर चली थी 400 राउंड गोलियां
मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी 1985 से मुहम्मदाबाद सीट से विधायक बनते आ रहे थे। 1996 में पहली बार भाजपा के टिकट पर कृष्णानंद राय ने अफजाल अंसारी को चुनौती दी लेकिन वो दूसरे नंबर पर रहें। हालांकि, साल 2002 के विधानसभा चुनाव में कृष्णानंद राय ने मुख्तार के भाई को 8000 वोटों से मात दी थी। मुख्तार अंसारी के भाई की हार पूरे पूर्वांचल में एक बड़ी खबर बन गई थी। कृष्णानंद राय ने एक अभेद किला को भेद दिया था। और यही बात मुख्तार अंसारी को रास नहीं आई। और फिर शुरु हुई उत्तर प्रदेश का सबसे नृशंस हत्या की साजिश। हालांकि, मुख्तार उस वक्त जेल में बंद था। उसने जेल में बैठ कर पूरी प्लानिंग की। और एक-एक जानकारी मोबाइल के माध्यम से लेता रहा। कृष्णानंद राय की हत्या की प्लानिंग हुई। इसमें अभय सिंह, मुन्ना बजरंगी समेत कई अन्य लोगों को शामिल किया गया। क्योंकि कृष्णानंद राय बुलेट प्रूफ गाड़ी में चला करते थे तो उस गाड़ी को भेदने के लिए एलएमजी मंगवाया गया। फिर 29 नंवबर 2005 को इस अदावत को हमेशा के लिए खत्म कर दिया गया। घात लगाए बैठे मुख्तार के गुर्गो ने एके47 का मुंह कृष्णानंद राय के काफिले की ओर खोल दिया। कुल 400 से अधिक गोलियां चलाई गई। मरने के बाद भी कृष्णानंद राय के सर में गोली मारी गई। कृष्णानंद राय समेत 7 लोगों की इसमें मौत हो गई। और इस पूरे मंजर का गवाह जेल में बैठा मुख्तार अंसारी भी बना। हालांकि, इस हत्या से लखनऊ से दिल्ली तक हिल गया था। इस हत्याकांड को लेकर लंबे संमय तक कोर्ट में सुनवाई चली। मामला सीबीआई को दिया गया। लेकिन साल 2019 में मुख्तार अंसारी समेत कई अन्य लोगों को बरी कर दिया गया।
Leave a comment