विश्व के दिग्गज नेताओं को पीछे छोड़ पीएम मोदी बने No.1, रैंकिंग में पिछड़े ट्रंप और मेलोनी भी

विश्व के दिग्गज नेताओं को पीछे छोड़ पीएम मोदी बने No.1, रैंकिंग में पिछड़े ट्रंप और मेलोनी भी

Morning Consult Approval Rating: दुनियाभर में गूंजा पीएम मोदी के नाम का डंका! जुलाई 2025में बिजनेस इंटेलिजेंस कंपनी मॉर्निंग कंसल्ट द्वारा किए गए ताज़ा सर्वेक्षण ने सबको चौंका दिया। दरअसल, भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 75%अप्रूवल रेटिंग हासिल कर वैश्विक नेताओं को पछाड़ दिया। यह शानदार सर्वेक्षण 4 जुलाई से 10 जुलाई 2025के बीच हुआ, जिसमें 20से ज़्यादा देशों के नेताओं की रेटिंग शामिल की गई।

दिग्गज नेताओं को पीछे छोड़ मोदी बने No.1

मॉर्निंग कंसल्ट के ताज़ा सर्वेक्षण में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 75%अप्रूवल रेटिंग के साथ वैश्विक नेताओं में No.1पर बने हुए हैं। इस सर्वे में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग (Lee Jae-myung) 59%रेटिंग के साथ दूसरे स्थान पर हैं। जेवियर मिलेई 57%लोगों के समर्थन के साथ तीसरे स्थान पर हैं। इनके बाद कनाडा के मार्क कार्नी (56%) और ऑस्ट्रेलिया के एंथनी अल्बनीज़ (54%) आते हैं। बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने भी अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में इस सर्वे के आंकड़ों को साझा कर पीएम मोदी की वैश्विक लोकप्रियता की सराहना की।

ट्रंप को मिली केवल 44%अप्रूवल रेटिंग

मॉर्निंग कंसल्ट के ताज़ा सर्वेक्षण के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को 44%लोगों का समर्थन हासिल है, लेकिन 50%लोग उनके खिलाफ हैं। दूसरी ओर, सबसे कम लोकप्रिय लोकतांत्रिक नेताओं में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन और चेक गणराज्य के प्रधानमंत्री पेट्र फिआला शामिल हैं, जिन्हें महज़ 18%लोगों का समर्थन मिला, जबकि 74%लोग उनसे नाराज़ हैं।

वैश्विक नेताओं की लोकप्रियता का ताज़ा लेखा-जोखा!

मॉर्निंग कंसल्ट के हालिया सर्वेक्षण में कई प्रमुख नेताओं की अप्रूवल रेटिंग सामने आई है। इटली की जॉर्जिया मेलोनी को 40%समर्थन मिला, लेकिन 54%लोग उनसे नाखुश हैं। जर्मनी के फ्रेडरिक मर्ज़ को 34%लोग पसंद करते हैं, जबकि 58%असंतुष्ट हैं। तुर्की के रेचेप तैय्यप एर्दोगन 33%समर्थन के साथ हैं, पर 50%लोग उनके खिलाफ हैं। ब्राजील के लूला द सिल्वा को 32%समर्थन और 60%असंतोष का सामना है। ब्रिटेन के कीर स्टार्मर की रेटिंग 26%समर्थन और 65%असंतोष के साथ कमज़ोर रही, जबकि जापान के शिगेरु इशिबा को केवल 20%समर्थन मिला और 66%लोग उनसे नाराज़ हैं।

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