Raghav Quits AAP: आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। AAP के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। साथ ही उन्होंने भाजपा में शामिल होने का ऐलान किया। इस्तीफा देते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि मैं पार्टी से दूर जा रहा हूं। AAP निजी फायदे के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि हम दो तिहाई सांसदों के साथ भाजपा में विलय कर रहे हैं।
राघव चड्ढा के अलावा हरभजन सिंह, स्वाती मालीवाल, राजेंद्र गुप्ता, संदीप पाठक, विक्रमजीत साहनी और अशोक मित्तल भी भाजपा का दामना थामने जा रहे हैं। राघव ने कहा कि सभी के हस्तारक्षर मेरे पास हैं। अब आपको ये भी बता देते हैं कि विजल को लेकर नियम क्या है?
बता दें कि भारत में राजनीतिक दलों का विलय संविधान की दसवीं अनुसूची (के तहत नियंत्रित होता है, जिसे 1985 में 52वें संशोधन द्वारा लाया गया था।
पार्टी के विलय को लेकर मुख्य नीतियां और नियम इस प्रकार हैं
दो-तिहाई बहुमत होना जरूरी: किसी राजनीतिक दल का दूसरे दल में विलय तब तक वैध नहीं माना जाता है, जब तक कि उस पार्टी के कम-से-कम दो-तिहाई विधायक या सांसद विलय के पक्ष में न हों।
अयोग्यता से सुरक्षा: यदि 2/3 सदस्य विलय के लिए सहमत होते हैं, तो विलय करने वाले सदस्यों और मूल पार्टी में रहने वाले सदस्यों की सदस्यता अयोग्य नहीं होती है।
91वां संवैधानिक संशोधनइससे पहले, एक-तिहाई सदस्यों के साथ भी विलय को मान्यता मिल जाती थी, लेकिन 2003 के संशोधन के बाद इसे बढ़ाकर दो-तिहाई कर दिया गया ताकि दलबदल पर रोक लगाई जा सके।
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क्या है विलय की प्रक्रिया
दोनों पार्टियों के बीच औपचारिक समझौता किया जाता है।
पार्टी के निर्वाचित प्रतिनिधि सांसद या विधायक विलय के पक्ष में प्रस्ताव पास करते हैं।
इसके बाद, विलय करने वाली पार्टी के कम से कम दो-तिहाई सदस्यों को दूसरे दल में शामिल होना अनिवार्य है।
निर्वाचन आयोग की भूमिका: विलय के बाद, नवनिर्मित दल को मान्यता के लिए चुनाव आयोग के पास जाना होता है, जो नियमों के पालन की पुष्टि के बाद नई इकाई को मान्यता देता है और चुनाव चिन्ह के बारे में फैसला करता है।