
आम बजट में रक्षा खर्च तय करते समय सरकार का ध्यान चीन और पाक से लगी सीमाओं पर पेश आ रहीं चुनौतियों से निपटने पर होगा। इसके लिए रक्षा आधुनिकीकरण का बजट करीब 15 फीसदी बढ़ाकर 90 हजार करोड़ रुपये किया जा सकता है।
पिछले बजट में तीनों सेनाओं के आधुनिकीकरण के लिए करीब 78 हजार करोड़ रुपये का बजट दिया गया था। लेकिन वायुसेना को दो सौ नए लड़ाकू विमानों की जरूरत है। नौसेना के नए पोत निर्माण, माउंटेन कोर औंर अन्य रक्षा जरूरतों को देखते हुए आधुनिकीकरण और नई खरीद का आवंटन बढ़ना तय है।
सरकार ने संकेत दिया है कि जवानों की सुविधाओं में बढ़ोत्तरी और सुरक्षा बलों को आधुनिक तकनीकी से लैस करना उसके प्रमुख एजेंडे में है। सूत्रों ने कहा कि रक्षा बजट दो लाख 58 हजार करोड़ से तीन लाख करोड़ के आसपास पहुंच सकता है।
जवानों की सुविधाएं भी बढ़ेंगी
जवानों के खानपान व सुविधाओं को लेकर छिड़ी बहस की छाया भी बजट में दिखेगी। वन रैंक वन पेंशन की विसंगतियों को दूर करने का प्रयास भी बजट में नजर आएगा। अत्याधुनिक रडार,विमान और खुफिया उपकरणों की खरीद के लिए आवंटन पहले की तुलना में बढ़ेगा।
स्मार्ट निगरानी पर तीन हजार करोड़
सीमावर्ती इलाकों में लेजर तकनीक, अंडरग्राउंड सेंसर,भूमिगत उपकरणों की खरीद से सीमाओं की स्मार्ट निगरानी के लिए करीब तीन हजार करोड़ रुपये दिए जा सकते हैं। पाकिस्तान,बांग्लादेश सीमाओं पर हाईटेक सर्विलांस सिस्टम को मजबूत किया जाएगा। सीसीटीएनएस के तहत पुलिस आधुनिकीकरण और साइबर सुरक्षा पर फोकस किया जाएगा। साथ ही आधारभूत ढांचा तैयार करने की तैयारी है।
आतंरिक सुरक्षा पर फोकस
आंतरिक सुरक्षा पर भी सरकार कोई कोताही बरतने के मूड में नहीं है। लिहाजा गृह मंत्रालय का बजट 77 हजार करोड़ से 85-90 हजार करोड़ रुपये पहुंच सकता है। इसमें बड़ा हिस्सा बीएसएफ, सीआरपीएफ जैसे बलों का है।
सरकार से संकेत मिले हैं कि अर्धसैनिक बलों के लिए नए उपकरणों की खरीद, आधारभूत ढांचे का आधुनिकीकरण, शोध एवं विकास और जवानों की सुविधाओं में इजाफा करने के लिए वित्तीय आवंटन बढ़ेगा। साइबर सुरक्षा पर विशेष फोकस रहेगा।
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