दिल्ली में खतरनाक स्तर पर प्रदूषण, 1800 स्कूल बंद

दिल्ली में खतरनाक स्तर पर प्रदूषण, 1800 स्कूल बंद

नई दिल्ली : राजधानी दिल्‍ली समेत पूरे एनसीआर में प्रदूषण के चलते आपातकाल जैसे हालात उत्‍पन्‍न हो गए हैं। बच्‍चों के स्‍वास्‍थ्‍य के मद्देनजर दिल्‍ली के सरकारी स्‍कूलों समेत कुल 1800 स्‍कूलों को दो‍ दिनों तक बंद कर दिया गया है। दिल्‍ली सरकार का कहना है कि अगर हालात में सुधार नहीं हुआ तो स्‍कूलों को आगे भी बंद किया जाएगा।

दिल्‍ली में बाकायदा चेतावनी जारी की गई है कि लोग घरों से मास्क पहन कर ही निकले। डाक्‍टरों ने लोगों को सुबह सैर पर नहींं जाने की सलाह दी है। डाक्‍टरों का कहना है कि दीपावली के बाद राजधानी की आबोहवा स्वास्थ्य के लिए जहरीली हो गई है। यह गैस जहरीली होती है और यह साइलेंट किलर होती है।

चिकित्‍सकों की राय है कि यदि वातावरण में इसकी मात्रा बहुत अधिक बढ़ जाए तो तुरंत जान जा सकती है। हवा में इसकी मात्रा 5 से 6 पीपीएम हो तो गर्भवती महिलाओं के भ्रुण पर असर पड़ता है।

इसके चलते अस्पतालों में सांस के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। डॉक्टर कहते हैं कि दिल्ली में कई जगहों पर कार्बन मोनोडाइऑक्साइड की मात्रा खतरनाक स्तर तक पहुंच गई है। इसके चलते हार्ट अटैक होने का खतरा है।

ऐसे में प्रदूषित वातावरण में लोग निकलने से बचें। मास्क लगाकर घरों से निकलें। बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए प्रदूषण ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के महासचिव डॉ. केके अग्रवाल ने कहा कि पीएम-10 और पीएम-25 का स्तर बढऩे से तो बीमार होने की आशंका है ही। कार्बन मोनोडाइऑक्साइड भी खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है।

उन्होंने कहा कि सुबह नौ बजे पंजाबी बाग में कार्बन मोनोडाइऑक्साइड का स्तर 10.1 पीपीएम (पार्ट पर मिलियन) था। वहीं आरके पुरम में 7.8 व मंदिर मार्ग में 5.19 पीपीएम था। जो सामान्य स्तर 4 पीपीएम से ज्यादा था।

इसके अलावा गर्भस्थ बच्चे का शारीरिक विकास प्रभावित हो जाता है। इस तरह प्रदूषण कुपोषण के लिए भी जिम्मेदार है। इसके अलावा इसका स्तर सात पीपीएम होने पर अस्पतालों में अस्थमा के मरीजों के दाखिले 6 फीसद बढ़ जाते हैं। पंजाबी बाग में इसकी मात्रा सबसे अधिक घातक थी।

क्योंकि कार्बन मोनोडाइऑक्साइड की मात्रा 10 पीपीएम से अधिक होने पर हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। आरएमएल अस्पताल के मेडिसिन विभाग के डॉ. देश दीपक ने कहा कि अस्पताल में सांस के मरीज इलाज के लिए पहले के अपेक्षा अधिक पहुंच रहे हैं।

इस मौसम में ऐसा हर साल होता है। उन्होंने कहा कि अभी जिस तरह का वातावरण है उससे लोगों को विशेष सतर्क रहने की जरूरत हैं। सांस के पुराने मरीज नियमित दवा लेते रहें।

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