
Swaminarayan Sanstha: बुधवार को पीएम मोदी ने अबू धाबी के पहले हिंदू मंदिर का उद्घाटन किया। इस मंदिर का निर्माण बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण (BAPS) संस्था ने 700करोड़ की लागत में किया है। इस मंदिर के निर्माण के साथ ही स्वामीनारायण संप्रदाय भी काफी चर्चा हो रही है। दरअसल, स्वामीनारायण संप्रदाय की स्थापना स्वामी सहजानंद ने की थी। इनका जन्म 1781में हुआ था। स्वामी सहजानंद को भगवान स्वामीनारायण के नाम से भी जानते हैं। इनका वास्तविक नाम घनश्याम पांडे था।
200 साल पहले रखी थी कि नींव
घनश्याम पांडे का जन्म उत्तर प्रदेश में हुआ था। अमेरिका से लेकर ब्रिटेन और अफ्रीका तक दुनियाभर में इस संप्रदाय के एक हजार से अधिक मंदिर हैं। स्वामी सहजानंद ने एक योगी और तपस्वी के रूप में अपना पूरा जीवन कृष्ण भक्त के रूप में बिताया। स्वामी सहजानंद उत्तर प्रदेश से गुजरात पहुंचे। यहां भी उन्होंने करिश्माई व्यक्तित्व की छाप छोड़ी। फिर यहां आकर ही वो घनश्याम पांडे से सहजानंद स्वामी बने और 200 साल पहले स्वामीनारायण संप्रदाय की नींव रखी। बता दें, हिन्दू धर्म में कई संप्रदाय हैं। स्वामी नारायण संप्रदाय भी इसी धर्म का हिस्सा माना जाता है। इसके समर्थक वैष्णव संप्रदाय के अनुयायी ही हैं, जो कृष्ण के अवतार को भी सर्वोच्च भगवान मानते हैं।
गुजरात में बनाया पहला मंदिर
इस संप्रदाय का पहला हिंदू मंदिर गुजरात के अहमदाबाद में बनवाया था। इसके अलावा भुज , मुली, वडताल, जूनागढ़, धोलेरा, ढोलका, गढ़पुर और जेतलपुर के अलावा देश के कई राज्यों और दुनिया के कई देशों में बनवाए गए।ये मंदिर भगवान कृष्ण की लीलाओं और प्रधानता को दर्शाते हैं।
फिलहाल महंत स्वामी महाराज इस संप्रदाय के छठवें उत्तराधिकारी हैं। उन्हें 20 जुलाई 2012 को संप्रद्राय का आध्यात्मिक गुरु घोषित किया गया था। इसके बाद महंत स्वामी महाराज के नेतृत्व में BAPS संस्था ने देश ही नहीं, दुनिया के कई देशों में कई स्वामीनारायण मंदिर बनवाए।
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