कब और क्यों मनाया जाता है International Tiger Day? जानें अब कैसी है भारत में बाघों की स्थिती

कब और क्यों मनाया जाता है International Tiger Day? जानें अब कैसी है भारत में बाघों की स्थिती

International Tiger Day 2023: हर साल 29 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत पहले से ही इस शक्तिशाली प्रजाति को बचाने में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है जो कभी विलुप्त होने की कगार पर थी। सरिस्का (राजस्थान) और पन्ना (मध्य प्रदेश) के बाघों को खोकर बाघ संरक्षण के सबसे बुरे संकट को देखने के बाद, भारत अब वैश्विक बाघों की लगभग 75% आबादी का घर बन गया है।

आपको बता दें कि, 9 अप्रैल को, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने बाघ जनगणना जारी की जिसमें कहा गया कि देश में बाघों की संख्या 3167 तक पहुंच गई है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए देश के सभी 51 टाइगर रिजर्व के प्रयासों की सराहना की।अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस - 29 जुलाई को केंद्रीय वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन (MoEF&CC) मंत्री श्री भूपेन्द्र यादव सभी राज्यों और टाइगर रिजर्व (tiger reserves)के शीर्ष वन अधिकारियों का एक रिपोर्ट कार्ड पेश करेंगे। वह राजयों के हिसाब से 2022 बाघ गणना और बाघ रिजर्व-वार आंकड़े पेश करेंगे।

अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस का उद्देश्य

वैश्विक बाघ दिवस का उद्देश्य शक्तिशाली बाघों के संरक्षण के प्रयासों के बारे में समाज में जागरूकता पैदा करना है। इसके साथ ही एक ऐसे भविष्य के निर्माण की प्रतिज्ञा को याद रखना है जहां मनुष्य और बाघ सह-अस्तित्व में रह सकें। इस साल, दुनिया बाघों के विलुप्त होने और उन्हें बचाने की आवश्यकता के बारे में जागरूकता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करेगी।

जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में होंगे ये कार्यक्रम

जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व, उत्तराखंड में आयोजित कार्यक्रम में वन विभाग और टाइगर रिजर्व के सभी मान्यता प्राप्त व्यक्तियों के भाग लेने की उम्मीद है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के सदस्य सचिव डॉ. एसपी यादव भी मौजूद रहेंगे। इस अवसर पर कई छोटी फिल्में, पुरस्कार और रिपोर्ट जारी की जाएंगी। टाइगर रिजर्व वार जनगणना के अलावा, टीआर की निदर्शी प्रोफ़ाइल और प्रबंधन प्रभावी मूल्यांकन अंतिम रिपोर्ट भी सार्वजनिक की जाएगी।

जाने अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस का इतिहास

2010 में, सभी जंगली बाघों में से 97% के गायब हो जाने और केवल 3,000 के करीब जीवित बचे रहने की खबर ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था। इसके बाद रूस में सेंट पीटर्सबर्ग टाइगर शिखर सम्मेलन हुआ जिसमें 29 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस मनाने का निर्णय लिया गया। बाघ बहुल देशों की सरकारें 2010 में आगे आईं और बाघों की आबादी दोगुनी करने का संकल्प लिया। उनके अलावा विश्व वन्यजीव कोष जैसे विभिन्न वन्यजीव संस्थान भी बाघों की रक्षा करने और अंततः पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करने के उद्देश्य से इस दिन को मनाते हैं।

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