
UP Digital Attendance: यूपी के प्राइमरी स्कूलों के टीचर्स की डिजिटल अटेंडेंस को लेकर भारी विवाद चल रहा है। टीचर फेस रिकग्नशन सिस्टम यानी चेहरा दिखाकर हाजिरी लगाने का विरोध कर रहे है। सरकार के आदेश के बाद भी पूरे यूपी के टीचर डिजिटल हाजरी नहीं लगा रहे है और काली पट्टी बांधकर स्कूल में पढ़ा रहे हैं। ऐसे में यूपी सरकार को शिक्षकों के आगे झुकना पड़ा है। शिक्षा विभाग की तरफ से जारी आदेश में टीचरों को अब किसी भी समय डिजिटल हाजिरी लगाने की छूट दे दी गई है।
बता दें कि पहले सरकार ने सवेरे 8:30 बजे और स्कूल में छुट्टी होने के बाद दोपहर 2:30 बजे तक हाजिरी लगाने के निर्देश थे। लेकिन यूपी के 6 लाख 35 हजार टीचर ये सरकारी आदेश मानने को तैयार नहीं हुए। हाजिरी लगाने के लिए सभी सरकारी स्कूलों में दो टैबलेट दिए गए थे, लेकिन कोई भी शिक्षक डिजिटल हाजिरी नहीं लगा रहा है। इसके साथ ही शिक्षकों का आरोप था कि एक भी मिनट देर होने पर डिजिटल हाजिरी नहीं लग पा रही थी,जिस एप पर हाजिरी लगानी होती है“प्रेरणा एप” वो नहीं खुलता है। इसी एप से शिक्षकों को अपनी और स्टूडेंट की हाजिरी लगाने को कहा गया था। दिलचस्प बात ये है कि स्टूडेंट की डिजिटल हाजिरी लग रही है, लेकिन टीचर अपनी अटेडेंस नहीं लगा रहे है। टीचरों की तरफ से ये भी कहा गया कि इंटरनेट नेटवर्क काम नहीं करने से डिजिटल हाजिरी लगाने में असुविधा है। टीचर और शिक्षा विभाग में जारी तनातनी के बीच 11 जुलाई को सीएम योगी आदित्यनाथ ने बैठक भी बुलाई थी। इसी मीटिग के बाद सरकार ने अपना स्टैड बदल लिया है।
डिजिटल अटेंडेस की व्यवस्था क्यों लाई सरकार
दरअसल, पहले यूपी में पड़े पैमाने पर फर्जी टीचर पढ़ा रहे थे। नौकरी पाने के लिए टीचर कई तरह की जालसाजी कर रहे है। पूरे मामले की जांच मुख्यमंत्री ने साल 2019 में यूपी एसटीएफ को दी। एसटीएफ ने करीब 1500 टीचर्स के खिलाफ कारवाई भी की थी। जांच में पता चला कि एक ही वख्त में एक टीचर अलग-अलग जिलों में कई सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहा है। 2021 में योगी सरकार ने प्रेरणा एप लांच किया। सरकार का कहना है कि डिजिटल हाजिरी से स्कूलों में गड़बड़ी रुकेगी। सभी टीचर्स को टाइम से स्कूल आना और जाना होगा, जिस टीचर को नौकरी मिली है उसी को पढ़ाना होगा और इससे बच्चों को बेहतर शिक्षा दी जा सकेगी।
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