Uttar Pradesh Expressway News: उत्तर प्रदेश में हाईस्पीड सड़क नेटवर्क को नई रफ्तार देने की तैयारी है। प्रदेश में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे जैसे प्रमुख कॉरिडोर के बाद अब सरकार इन सड़कों को आपस में जोड़कर एक मजबूत एक्सप्रेसवे ग्रिड विकसित करने पर फोकस कर रही है। इस योजना के तहत करीब 67,800 करोड़ रुपये के निवेश से 932 किलोमीटर के आठ नए लिंक और ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे विकसित करने की योजना बताई गई है।
इस नेटवर्क का उद्देश्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों के बीच सीधी कनेक्टिविटी बढ़ाना, बड़े शहरों में ट्रैफिक का दबाव कम करना और औद्योगिक क्षेत्रों, एयरपोर्ट, धार्मिक स्थलों तथा पड़ोसी राज्यों तक पहुंच आसान बनाना है। प्रस्तावित परियोजनाओं में झांसी लिंक एक्सप्रेसवे, जेवर-गंगा लिंक एक्सप्रेसवे, लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे, फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे, चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे, विंध्य एक्सप्रेसवे, विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे और हरिद्वार लिंक एक्सप्रेसवे शामिल हैं।
क्या है यूपी एक्सप्रेसवे ग्रिड योजना ?
उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) के माध्यम से राज्य के एक्सप्रेसवे नेटवर्क को आपस में जोड़ने की योजना पर काम किया जा रहा है। इसका मकसद केवल नए एक्सप्रेसवे बनाना नहीं, बल्कि मौजूदा हाईस्पीड कॉरिडोर के बीच ऐसे संपर्क मार्ग तैयार करना है, जिससे यात्रियों और मालवाहक वाहनों को लंबा चक्कर न लगाना पड़े।
इस नेटवर्क के विकसित होने से बुंदेलखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, मध्य यूपी और विंध्य क्षेत्र को बेहतर सड़क कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। साथ ही, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर), औद्योगिक शहरों और दिल्ली-एनसीआर की ओर आने-जाने वाले वाहनों के लिए भी वैकल्पिक मार्ग विकसित हो सकते हैं।
1. झांसी लिंक एक्सप्रेसवे: बुंदेलखंड और डिफेंस कॉरिडोर को मिलेगी रफ्तार
झांसी लिंक एक्सप्रेसवे को बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। प्रस्तावित छह लेन का ग्रीनफील्ड कॉरिडोर जालौन में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे को झांसी और बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (BIDA) की औद्योगिक सिटी से जोड़ेगा।
इससे झांसी और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों, रक्षा उत्पादन तथा माल परिवहन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
प्रस्तावित लंबाई: लगभग 118.9 किलोमीटर
निर्माण लागत: करीब 5,001 करोड़ रुपये
भूमि अधिग्रहण सहित अनुमानित लागत: लगभग 7,968 करोड़ रुपये
निर्माण अवधि: करीब 3 साल
टेंडर की प्रस्तावित समयसीमा: 15 अक्टूबर
इस परियोजना से बुंदेलखंड के औद्योगिक विकास और डिफेंस कॉरिडोर तक पहुंच आसान बनाने का लक्ष्य है।
2. जेवर-गंगा लिंक एक्सप्रेसवे: नोएडा एयरपोर्ट से सीधा संपर्क
जेवर-गंगा लिंक एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर की कनेक्टिविटी के लिहाज से अहम हो सकता है। प्रस्तावित छह लेन का ग्रीनफील्ड कॉरिडोर जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और यमुना एक्सप्रेसवे को बुलंदशहर के रास्ते गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा।
करीब 75 किलोमीटर लंबे इस प्रस्तावित मार्ग में लगभग 9 किलोमीटर का एलिवेटेड हिस्सा भी शामिल होने की बात कही गई है।
प्रस्तावित लंबाई: लगभग 75 किलोमीटर
निर्माण लागत: करीब 4,500 से 5,200 करोड़ रुपये
लेन: छह
टेंडर की प्रस्तावित समयसीमा: 15 अक्टूबर
निर्माण अवधि: लगभग ढाई से 3 साल
इस लिंक के बनने से पश्चिमी यूपी, मेरठ और दिल्ली-एनसीआर के यात्रियों को जेवर एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए बेहतर सड़क विकल्प मिल सकता है। साथ ही, गंगा एक्सप्रेसवे के जरिए प्रदेश के अन्य हिस्सों तक कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी।
3. लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे: शहर के ट्रैफिक से मिलेगी राहत
लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे का उद्देश्य आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के बीच सीधा संपर्क विकसित करना है। इससे दिल्ली-एनसीआर और आगरा की ओर से गाजीपुर तथा बिहार जाने वाले वाहनों को लखनऊ शहर के भीतर से गुजरने की जरूरत कम हो सकती है।
प्रस्तावित छह लेन का यह कॉरिडोर लखनऊ के आसपास एक्सप्रेसवे नेटवर्क को बेहतर तरीके से जोड़ने में मदद करेगा।
प्रस्तावित लंबाई: करीब 51 किलोमीटर
अनुमानित लागत: लगभग 4,776 करोड़ रुपये
लेन: छह
टेंडर की प्रस्तावित समयसीमा: 15 अक्टूबर
निर्माण अवधि: लगभग 2 से ढाई साल
इस परियोजना से लंबी दूरी के यात्रियों के समय की बचत होने और लखनऊ के प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव कम होने की उम्मीद है।
4. फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे: छह जिलों को मिलेगा फायदा
फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे के जरिए आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को फर्रुखाबाद से होते हुए शाहजहांपुर में गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने की योजना है। यह कॉरिडोर इटावा, मैनपुरी, कन्नौज, फर्रुखाबाद, हरदोई और शाहजहांपुर जैसे जिलों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
प्रस्तावित छह लेन का मार्ग इन जिलों को राज्य के दो प्रमुख एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जोड़कर यात्रा और माल परिवहन को सुविधाजनक बना सकता है।
प्रस्तावित लंबाई: करीब 91 किलोमीटर
अनुमानित लागत: लगभग 5,500 से 6,000 करोड़ रुपये
लेन: छह
भूमि अधिग्रहण: उपलब्ध जानकारी के अनुसार लगभग 95 प्रतिशत
निर्माण अवधि: करीब 30 महीने
टेंडर की प्रस्तावित समयसीमा: 15 अक्टूबर
इस परियोजना से मध्य यूपी के कई जिलों को हाईस्पीड सड़क नेटवर्क तक पहुंच मिलने की उम्मीद है।
5. चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे: धार्मिक पर्यटन और बुंदेलखंड को मिलेगा लाभ
चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे का प्रस्ताव बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे को चित्रकूट धाम और मध्य प्रदेश की सीमा से जोड़ने के लिए तैयार किया गया है। इससे धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ क्षेत्रीय आवागमन को भी बढ़ावा मिल सकता है।
प्रस्तावित मार्ग चार लेन का होगा, जिसे जरूरत के अनुसार छह लेन तक विस्तारित करने की संभावना बताई गई है।
प्रस्तावित लंबाई: करीब 15 किलोमीटर
अनुमानित लागत: लगभग 800 करोड़ रुपये
लेन: चार, भविष्य में छह लेन तक विस्तार का प्रस्ताव
टेंडर की प्रस्तावित समयसीमा: 30 अक्टूबर
निर्माण अवधि: करीब 2 से ढाई साल
यह लिंक चित्रकूट क्षेत्र को बुंदेलखंड के हाईस्पीड सड़क नेटवर्क से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इससे पर्यटन, स्थानीय कारोबार और औद्योगिक गतिविधियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
6. विंध्य एक्सप्रेसवे: प्रयागराज से सोनभद्र तक बनेगा नया कॉरिडोर
विंध्य एक्सप्रेसवे प्रस्तावित नेटवर्क की प्रमुख ग्रीनफील्ड परियोजनाओं में शामिल है। यह प्रयागराज से मिर्जापुर और भदोही होते हुए सोनभद्र तक जाने के लिए प्रस्तावित है। आगे इसे मध्य प्रदेश की सीमा और सिंगरौली क्षेत्र की कनेक्टिविटी से जोड़ने की योजना बताई गई है।
छह लेन का यह एक्सप्रेसवे विंध्य क्षेत्र के खनन, ऊर्जा और औद्योगिक केंद्रों को प्रदेश के अन्य हिस्सों से बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध करा सकता है।
प्रस्तावित लंबाई: करीब 320 से 333 किलोमीटर
अनुमानित लागत: लगभग 25,000 करोड़ रुपये
लेन: छह
टेंडर की प्रस्तावित समयसीमा: 30 नवंबर
निर्माण अवधि: लगभग 4 साल
इस परियोजना का एक प्रमुख उद्देश्य पूर्वी और दक्षिणी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों में सड़क कनेक्टिविटी बढ़ाना तथा औद्योगिक परिवहन को गति देना है।
7. विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे: वाराणसी और गाजीपुर तक बेहतर कनेक्टिविटी
विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे का उद्देश्य विंध्य एक्सप्रेसवे को वाराणसी-गाजीपुर क्षेत्र में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ना है। इससे सोनभद्र, मिर्जापुर और वाराणसी सहित आसपास के क्षेत्रों को गाजीपुर, बलिया और बिहार की ओर जाने वाले मार्गों से बेहतर संपर्क मिल सकता है।
प्रस्तावित लंबाई: करीब 117 किलोमीटर
अनुमानित लागत: लगभग 7,500 से 8,000 करोड़ रुपये
लेन: छह
टेंडर की प्रस्तावित समयसीमा: 30 नवंबर
निर्माण अवधि: लगभग 3 साल
यह लिंक विंध्य क्षेत्र के खनन और ऊर्जा केंद्रों से पूर्वांचल के प्रमुख शहरों तक माल और यात्रियों की आवाजाही आसान बनाने में मदद कर सकता है।
8. हरिद्वार लिंक एक्सप्रेसवे: यूपी से उत्तराखंड जाना होगा आसान
हरिद्वार लिंक एक्सप्रेसवे का प्रस्ताव पश्चिमी उत्तर प्रदेश को उत्तराखंड के प्रमुख शहरों से बेहतर सड़क संपर्क देने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण है। इस छह लेन के ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के जरिए मेरठ और मुजफ्फरनगर की ओर से हरिद्वार तथा रुड़की तक कनेक्टिविटी मजबूत करने की योजना है।
प्रस्तावित लंबाई: करीब 120 से 146 किलोमीटर
अनुमानित लागत: लगभग 10,500 करोड़ रुपये
लेन: छह
टेंडर की प्रस्तावित समयसीमा: 30 नवंबर
निर्माण अवधि: करीब 3 साल
इस मार्ग से दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी यूपी से उत्तराखंड के धार्मिक तथा पर्यटन स्थलों तक पहुंचने वाले यात्रियों को बेहतर विकल्प मिल सकता है। हालांकि, अंतिम रूट और परियोजना की समयसीमा आधिकारिक मंजूरी तथा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पर निर्भर करेगी।
यूपी एक्सप्रेसवे ग्रिड से क्या बदलेगा?
आठ प्रस्तावित लिंक और ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के अलग-अलग सड़क कॉरिडोर को एक-दूसरे से जोड़ने की दिशा में अहम कदम हो सकते हैं। इनके जरिए राज्य के कई ऐसे जिलों को भी हाईस्पीड सड़क नेटवर्क तक पहुंच मिलने की उम्मीद है, जो फिलहाल प्रमुख एक्सप्रेसवे से सीधे नहीं जुड़े हैं।
इस योजना के संभावित फायदे हैं:
यात्रा में समय की बचत: प्रमुख शहरों और एक्सप्रेसवे के बीच सीधे संपर्क मार्ग विकसित होने की संभावना।
ट्रैफिक जाम में कमी: लखनऊ जैसे बड़े शहरों से होकर गुजरने वाले लंबी दूरी के यातायात को वैकल्पिक मार्ग मिल सकता है।
औद्योगिक विकास: बुंदेलखंड डिफेंस कॉरिडोर, BIDA औद्योगिक क्षेत्र और विंध्य के खनन-ऊर्जा केंद्रों को बेहतर कनेक्टिविटी।
एयरपोर्ट कनेक्टिविटी: जेवर एयरपोर्ट तक पश्चिमी यूपी और दिल्ली-एनसीआर से पहुंच बेहतर हो सकती है।
पर्यटन को बढ़ावा: चित्रकूट, हरिद्वार और अन्य प्रमुख पर्यटन क्षेत्रों तक सड़क संपर्क मजबूत होने की उम्मीद।
माल परिवहन में सुविधा: लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक क्षेत्रों के बीच माल की आवाजाही अधिक सुविधाजनक हो सकती है।
कब तक पूरे होंगे यूपी के नए एक्सप्रेसवे?
प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार, अलग-अलग परियोजनाओं के टेंडर अक्टूबर और नवंबर की समयसीमाओं में जारी या पूरे किए जाने हैं। निर्माण अवधि परियोजना के अनुसार लगभग 30 महीने से चार साल तक बताई गई है।
हालांकि, टेंडर की तारीख और निर्माण अवधि को अंतिम तथा वर्तमान सरकारी कार्यक्रम मानने से पहले UPEIDA की आधिकारिक जानकारी से पुष्टि करना जरूरी है। इसी तरह, 67,800 करोड़ रुपये के कुल निवेश, 932 किलोमीटर की संयुक्त लंबाई और प्रत्येक परियोजना की लागत को भी संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों से सत्यापित किया जाना चाहिए।