What Is SEM Court:सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई को लेकर SEM कोर्ट का नाम चर्चा में है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर SEM कोर्ट क्या है और यह सामान्य अदालत से कितनी अलग होती है? SEM का पूरा नाम स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (Special Executive Magistrate) है। इसकी मुख्य जिम्मेदारी शांति व्यवस्था बनाए रखने और संभावित विवाद या अशांति को रोकने से जुड़ी कानूनी कार्रवाई करना है।
SEM सामान्य आपराधिक अदालत की तरह सभी आपराधिक मामलों की सुनवाई नहीं करता। इसके पास कानून के तहत शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरवाने और निवारक कार्रवाई से जुड़े अधिकार होते हैं। अगर प्रशासन को आशंका हो कि किसी व्यक्ति की गतिविधियों से शांति भंग हो सकती है, तो कानून में तय प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
सौरव-रांका की रिहाई क्यों अटकी?
सौरव दास और आशुतोष रांका के मामले में पहले से दिए गए बॉन्ड की शर्तों और जमानतदारों को लेकर विवाद सामने आया है। हिरासत बढ़ाने के आदेश को दोनों की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। 21 अक्टूबर को उनकी ओर से याचिका वापस ले ली गई। हालांकि, याचिका वापस लेने का मतलब अपने आप रिहाई का आदेश मिलना नहीं है।
सामान्य कोर्ट और SEM में क्या है अंतर?
सामान्य अदालत और SEM में सबसे बड़ा अंतर उनके अधिकार क्षेत्र का है। सामान्य आपराधिक अदालत अपराधों की सुनवाई, जमानत और कानून के मुताबिक सजा जैसे मामलों पर फैसला करती है, जबकि SEM की भूमिका मुख्य रूप से शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए निवारक कार्रवाई तक सीमित होती है। हालांकि, SEM के आदेश भी कानून के दायरे में होने चाहिए और उन्हें संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत चुनौती दी जा सकती है।
Also read: मुंबई में जयशंकर से मिले अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो, भारत-US ट्रेड डील पर बोले- हमें बहुत उम्मीद