7 बटालियन, 2 ब्रिगेड हेडक्वार्टर...2003 का वो ऑपरेशन, जिसमें सेना ने आतंकियों का किया था ऐसा हाल

7 बटालियन, 2 ब्रिगेड हेडक्वार्टर...2003 का वो ऑपरेशन, जिसमें सेना ने आतंकियों का किया था ऐसा हाल

Jammu-Kashmir: 90 के दशक में पाकिस्तान से पीओके में सैकड़ों की संख्या में आतंकी जम्मू-कश्मीर में आ घुसते थे और आतंकी गतिविधियों को अंजाम देते थे। उस समय कश्मीर और जम्मू को बांटने वाला पूरी पीर पंजाल रेज पर आतंकवादियों के द्वारा कब्जा कर लिया गया था। साल 2000 में तो हालात ये थे कि जम्मू आतंकी घटनाओं का एक परिक सेंटर बन गया था, जैसा की आज कल नजर आने लगा है।

बता दें कि हाल ही में जम्मू कश्मीर में भी कई आतंकवादी हमले हुए है। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने डोडा जिले में अलग-अलग आतंकी हमलों के सिलसिले में आतंकवादी संगठनों के सक्रिय सदस्यों के नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करते हुए चार लोगों को गिरफ्तार किया है। ये जानकारी पुलिस ने दी थी। डोडा जिले में सोमवार को आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में एक अधिकारी सहित चार शहीद हो गए थे।

आतंकियों का इलाज सर्प विनाश-2

पीर पंजाल रेज के दक्षिण में जम्मू का इलाका आता है। जब आतंकवाद चरम पर था तो इसे रोकने के लिए सेना ने अब तक सबसे बड़ा ऑपरेशन लॉन्च किया था,जिसका नाम था ऑपरेशन सर्प विनाश। दरअसल, 1998 से 2003 के बीच लश्कर और जैश के आतंकियों ने जम्मू के सूरनकोट के हिलकाका को अपना बेस बना लिया था। वहीं यहां पर सैकड़ों की संख्या में आतंकी इस जगह से ऑपरेट करते थे। सेना ने 21 अप्रैल को ऑपरेशन सर्प विनाश शुरू किया जो कि 10 दिन बाद 1 मई 2003 को खत्म हुआ।

ऑपरेशन में बटालियन की अहम भूमिका

गौरतलब है कि ये ऑपरेशन 150 वर्ग किलोमीटर के इलाके में फैला हुआ था, जिसे सूरनकोट के जंगलों के हिलकाका में अंजाम दिया गया था। इस ऑपरेशन में लगभग 7 बटालियन और 2 ब्रिगेड हेडक्वार्टरने हिस्सा लिया था। 9 पैरा के नेतृत्व में 163 इंफेट्री ब्रिगेड की 6 यूनिट और 12 RR सेक्टर शामिल था, जिसमें 2/4 गुरखा, 19 गढ़वाल रायफल, 16 और 20 RR शामिल थी।

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