AISA अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका पर हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही है। बता दें की नेहा ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की तरफ से जारी उस नोटिस को चुनौती दी है। जिसमे उन्हें शांति बनाए रखने के लिए 10,000 रुपए का निजी मुचलका और एक जमानतदार देने का निर्देश दिया है। मामले में नेहा बोरा के वकील ने कहा की इस मामले का दायरा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 126 और 130 के तहत जारी नोटिस तक सिमित है और नेहा बोरा सार्वजनिक जीवन में AISA की नेता हैं।
मामले को लेकर हाई कोर्ट ने कहा
वहीँ मामले को लेकर हाई कोर्ट ने कहा की वह याचिकाकर्ता के पक्ष में यह सवाल पूछ रहा है। और मामले की परिस्थतियों में संबंधित प्रावधान की व्याख्या जानना चाहता है। सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा की 'जैसा मैंने कल अभिक से कहा था' क्या आपके लिए बेहतर नहीं होगा की धारा 135 के तहत जांच पूरी होने दें क्या इसमें ज्यादा समझदारी नहीं होगी की जांच पूरी हो जाने तक का इंतजार किया जाए और फिर शनिवार को कोर्ट का रुख किया जाए। ताकि उसे रविवार को सुनवाई के लिए परेशान न करना पड़े।
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कौन किसके तरफ से कोर्ट में हुए पेश
बता दें की सुनवाई के दौरान नेहा बोरा के तरफ से सीनियर वकील गोपाल शंकरनारायणन पेश हुए। वहीं राज्य सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिस्टर जनरल चेतन शर्मा और सेन्ट्रल गवर्मेंट स्टैंडिंग काउंसिल आशीष दीक्षित भी पेश हुए। वकील ने दलील दी की संबंधित प्रदर्शन पूरी शांतिपूर्ण थे। साथ ही उन्होंने कहा की ना ही नेहा बोरा ने ना तो हिंसा का आवाहन किया और न हिंसा के लिए लोगों को उकसाया। नेहा बोरा के केस में मजिस्ट्रेट के उस नोटिस को चुनौती दी गयी है। जिसमे उनसे निजी मुचलका और एक जमानतदार देने का निर्देश दिया है। हाई कोर्ट में इस नोटिस को लेकर दोनों की दलीलें सुनी जा रही हैं।