
Divorce approved after 38 years: आज के समय में तलाक एक आम बात हो गई है। कोई शादी के एक साल बाद ही तलाक की अर्जी डाल रहा है, तो कोई शादी के काफी सालों के बाद अलग होने की बात कहता है। हालांकि, पति-पत्नी की मर्जी से कानूनीतौर पर दोनों को तलाक भी मिल जाता है। इसके लिए दोनों को कुछ समय का इंतजार करना पड़ता है। लेकिन, जब तलाक की अर्जी के 38 साल बाद कोर्ट से दोनों को तलाक के आदेश दिए जाए। तो आप क्या करोगे?ऐसा ही एक मामला सामने आया है जिसमें पिछले 38 साल से तलाक की अर्जी को कोर्ट ने स्वीकार किया है।
शादी के 38 साल बाद मिला कानूनी तलाक
ये बात शुरू होती है 1981 की। जब एत रिटायर्ड इंजीनियर ने शादी रचाई। लेकिन कई सालों तक पत्नी को बच्चे नहीं होने के कारण दोनों 1985में अलग हो गया और पति ने जुलाई 1985में भोपाल में तलाक के लिए आवेदन पेश किया, लेकिन उसका दावा खारिज हो गया। इसके बाद पति ने विदिशा न्यायालय में तलाक के लिए आवेदन दिया। इसके उलट दिसंबर 1989में पत्नी ने संबंधों की पुनर्स्थापना के लिए कुटुंब न्यायालय ग्वालियर में आवेदन पेश किया। पति और पत्नी की एक-दूसरे के खिलाफ अपीलों के चलते ये मामला लंबे समय तक कोर्ट में घूमता रहा। लेकिन, तलाक की अर्जी नहीं स्वीकार हुई।
पति ने तलाक से पहले कर ली थी दूसरी शादी
इसका एक कारण था कि पत्नी के पिता एक सीनियर पुलिस में थे और वो नहीं चाहते थे कि उनकी बेटी की शादी टूटे। 1990में पति ने दूसरी शादी कर ली थी। दूसरी पत्नी से इस रिटायर्ड इंजीनियर के दो बच्चे भी हैं जिनकी शादी भी हो चुकी है। 38सालों की कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार पति और पहली पत्नी सहमति से तलाक के लिए राजी हो गए हैं। हाईकोर्ट ने पति को निर्देश दिए हैं कि वह पत्नी को एकमुश्त बारह लाख रुपए चुकाएंगे। लेकिन महिला के भाइयों की समझाइश के बाद पति-पत्नी सहमति से तलाक लेने के लिए राजी हो गए। हाईकोर्ट ने रिटायर्ड इंजीनियर को आदेश दिया है कि वह पत्नी को तलाक की एवज में 12लाख रुपये का गुजारा भत्ता देगा।
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