
Health: कैंसर का नाम सुनते ही अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाते हैं क्योंकि कैंसर की बीमारी होने के बाद बहुत कम लोग जी पाते हैं। इस बीच एक रिसर्च सामने आया है जिसमें कहा जा रहा है कि इंसानों की डीएनए में बचे गए प्राचीन वायरस फेफड़ों के कैंसर के इलाज में मदद कर सकते हैं।
रिसर्च के मुताबिक प्राचीन वायरस फेफड़ों के कैंसर से लड़ने में एंटीबॉडी की तरह काम करता है। शोध के दौरान इम्यूएनोथेरेपी के लिए बेहतर प्रतिक्रियाओं और कैंसर के ट्यूमर के चारों ओर एंटीबॉडी बनाने वाली बी सेल्सब के बीच लिंक का पता लगाया गया। शोध में पाया गया कि इंसानों के डीएनए में बची हुई पुरानी कोशिकाओं होती हैं। इनको एंडोजेनस रेट्रोवायरस कहा जाता है। ये ईआरवी वायरल रोगों से बच गए हमारे पूर्वजों की पीढ़ियों से गुजरता है। यही कैंसर से लड़ने में रोगप्रतिरोधक प्रणाली की मदद करता है।
वहीं विश्लेषण में पाया कि बी सेल्स फेफड़े के कैंसर से छुटकारा दिलाने में मददगार होती हैं। ये बी कोशिकाएं ट्यूमर के खिलाफ एंटीबॉडी बनाती हैं। बता दें कि दुनिया भर में फेफड़ों के कैंसर से सबसे ज्या दा लोगों की मौत होती है हालांकि, रोगियों के इलाज में अब इम्यूनोथेरेपी और टारगेटेड थेरेपी का इस्तेकमाल बखूबी किया जा रहा है। शोध में पाया गया कि एंटीबॉडी ने प्राचीन वायरल डीएनए को पहचाना. यह वायरल डीएनए लगभग 5 फीसदी मानव जीनोम बनाता है।
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