
Kanwar Yatra Nameplate Controversy: उत्तर प्रदेश में सियासी घमासान के बीच अब एक और विवाद शुरू हो गया है। यूपी सरकार ने पहले मुजफ्फरनगर जिले में 240 किलोमीटर लंबे कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित सभी होटलों, ढावों और ठेलों के मालिकों या इन दुकानों पर काम करने वालों के नाम प्रदर्शित करने के आदेश दिया है। हालांकि, फिर सरकार ने शुक्रवार को पूरे राज्य में कांवड़ मार्गों के दुकानदारों के लिए ऐसा ही आदेश जारी कर दिया गया।
बता दें कि यूपी सरकार के इस फैसले के बाद नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जेडीयू, जयंत चौधरी की आरलेडी और चिराग पासवान की एलजेपी ने इस फैसले को गलत बताया है। जेडीयू ने कहा कि यूपी सरकार का फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबका साथ, सबका विकास मंत्र के खिलाफ है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने कहा, “ यह मुसलमानों की पहचान करने और लोगों को उनसे सामान न खरीदने के लिए प्रोत्साहित करने जैसा है। इस प्रकार का आर्थिक बहिष्कार समाज के लिए अनुचित है। दरअसल ये पीएम मोदी के सबका साथ,सबका विकास, सबका विश्वास के मंत्र के खिलाफ है। उन्होंने इस फैसले को वापस लेने की मांग की है।
चिराग पासवान ने कही ये बात
रामाशीष राय ने एक ट्वीट में कहा,“उत्तर प्रदेश प्रशासन का दुकानदारों को अपनें दुकान पर अपना नाम और धर्म लिखनें का निर्देश देना जाती और सम्प्रदाय को बढ़ाआ देनें वाला कदम है, प्रशासन इसे वापस लें यह गैर संवैघानिक निर्णय है”।इसके अलावा चिराग पासवान ने कहा,“हमें इन दोनों वर्गों के लोगों के बीच की खाई को पाटने की जरूरत है। गरीबों के लिए काम करना हर सरकार की जिम्मेदारी है, जिसमें समाज के सभी वर्ग जैसे दलित,पिछड़े, ऊंची जातियां और मुस्लिम भी शामिल हैं। समाज में सभी लोग हैं। हमें उनके लिए काम करने की आवश्यकता है”।
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