पश्चिम बंगाल में अचानक क्यों बड़ी कॉन्डम की बिक्री? जब पड़ताल हुई तो सभी के उड़ गए होश

पश्चिम बंगाल में अचानक क्यों बड़ी कॉन्डम की बिक्री? जब पड़ताल हुई तो सभी के उड़ गए होश

Condom Addiction: पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में छात्र कंडोम के इस्तेमाल के आदी हो गए हैं। लेकिन हैरान करने वाली बात ये है कि ये छात्र इसका इस्तेमाल सुरक्षित सेक्स के लिए नहीं करते, बल्कि इसके जरिए नशा करते हैं। वे पहले कंडोम को गर्म पानी में भिगोते हैं और फिर उस पानी को पीते हैं। नतीजा यह होता है कि इससे नशा हो जाता है, जिसका असर 10 से 12 घंटे तक रहता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, दुर्गापुर सिटी सेंटर, बिधाननगर, बेनाचिटी और मुचिपारा, सी जोन, ए जोन समेत दुर्गापुर के कई हिस्सों में फ्लेवर्ड कंडोम की बिक्री काफी बढ़ गई है। एक दुकानदार ने एक नियमित ग्राहक से पूछताछ की और इस वृद्धि का कारण जाना। दुर्गापुर में एक मेडिकल दुकान के दुकानदारों ने मीडिया को बताया, "पहले प्रति दुकान प्रति दिन तीन से चार पैकेट कंडोम बेचे जाते थे। लेकिन अब एक दुकान में कंडोम के पैकेट खत्म हो रहे हैं।"

कॉन्डम कैसे कर रहा है युवाओं को मदहोश?

दुर्गापुर आरई कॉलेज मॉडल स्कूल में भौतिकी के शिक्षक नुरुल हक ने कहा, "कंडोम को लंबे समय तक गर्म पानी में भिगोने से प्रमुख कार्बनिक कंपाउंड टूट जाते हैं और अल्कोहल के कंपाउंड बनते हैं। ये कंपाउंड युवाओं को नशे की लत लगा रहे हैं।" दुर्गापुर उप-जिला अस्पताल के अधीक्षक धीमान मंडल ने बांग्लाहंट को बताया, "कंडोम में कुछ प्रकार के सुगंधित यौगिक होते हैं। इसे तोड़कर शराब बनाई जाती है। यह सुगंधित यौगिक डेंड्राइट्स में भी पाया जाता है। कई लोगों को इस यौगिक के प्रभाव में देखा गया है।"

क्या इसको लेकर देश में है कोई कानून?

कंडोम बाजार में आसानी से मिल जाता है और ये नशीले पदार्थों की कैटेगरी में भी नहीं आता है। नशे करने वाले कई लोग कफ सिरप, हैंड सैनिटाइजर, आफ्टरशेव, सूंघने वाला गोंद, पेंट, नेल पॉलिश, व्हाइटनर और यहां तक कि ब्रेड पर आयोडेक्स लगा कर भी खाते हैं।

वहीं पश्चिम बंगाल पुलिस ने अभी तक इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है। हैदराबाद में पुलिस ने हाल ही में कहा कि वे नशीली दवाओं के उपयोगकर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज नहीं कर सकते क्योंकि भारतीय दंड संहिता (IPC) में इससे निपटने के लिए कोई कानून नहीं है। पुलिस ने यह भी कहा कि व्हाइटनर और कफ सिरप जैसे उत्पादों में शामक की मात्रा कम होती है और ये नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक एक्ट (NDPS) के तहत नहीं आते हैं।

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