अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया में भारत खोज रहा ये अनमोल चीज, चीन को लगेगा बड़ा झटका

अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया में भारत खोज रहा ये अनमोल चीज, चीन को लगेगा बड़ा झटका

Critical Minerals: आज के समय में भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों के लिए काफ़ी हद तक जीवाश्म ईंधन पर निर्भर है। भारत और चीन काफी समय से साथ में कारोबार कर रहे है। लेकिन दोनों के बीच तनाव की स्थिति भी बनी रहती है। बता दें, चीन लिथियम का सबसे बड़ा उत्पादक वाला देश माना जाता है। ऐसे में भारत चीन पर अपनी निर्भरता को कम करने के लिए पूरी कोशिश कर रहा है। इसी कड़ी में भारत अब चीन को छोड़ ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका में इन खनिजों की खोज कर रहा है।

इस बीच, भारत के खनन सचिव वीएल कांता राव ने हाल ही में बताया था कि भारत खनिजों की खोज के लिए जाम्बिया, कांगो और ऑस्ट्रेलिया पहुंच रहा है। इन खनिजों में लिथियम, कोबाल्ट और तांबे जैसे खनिज शामिल हैं। खनन सचिव ने आगे बताया कि भारत सरकार अफ्रीकी देशों में खनिज की खोज कर रहा है।

क्यों जरूरी है ये खनिज?

दरअसल, हमारे स्मार्टफोन और इलेक्ट्रिक गाड़ियों के उत्पादन के लिए क्रिटिकल मिनरल बेहद महत्वपूर्ण हैं। बता दें, क्रिटिकल मिनरल्स वे खनिज होते हैं, जो किसी देश के आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ज़रूरी होते हैं। इसमें कोबाल्ट, तांबा, लिथियम और निकेल जैसे खनिज शामिल हैं।

इस मामले में खनन सचिव कांता राव ने बताया कि हाल ही में जाम्बिया ने भारत को कोबाल्ट और तांबे की खोज के लिए 9,000वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र देने पर सहमति जताई है। ऐसे में सरकार को उम्मीद है कि इस खोज के बाद इन महत्वपूर्ण धातुओं के खनन का अधिकार भारत को ही दिया जाएगा।

राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन को मिली मंजूरी

खनन सचिव कांता राव ने बताया कि पिछले महीने केंद्रीय मंत्रिमंडल ने  राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (एनसीएमएम) को मंजूरी दी थी। इसका प्रमुख उद्देश्य ये है कि भारत सार्वजनिक और निजी उद्यमों को विदेशों में संसाधन संपन्न देशों के साथ व्यापार साझेदारी को स्थापित कर सकें।

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