HINDU RITUALS: क्या है हिंदू धर्म में परिक्रमा का महत्व, क्यों की जाती है मंदिर में देवी-देवताओं की परिक्रमा; जानें

HINDU RITUALS: क्या है हिंदू धर्म में परिक्रमा का महत्व, क्यों की जाती है मंदिर में देवी-देवताओं की परिक्रमा; जानें

HINDU RITUALS: सनातन धर्म में मंदिर और उनसे जुड़े परंपराओं को धर्म ग्रंथों में बहुत ही विस्तार से बताया गया है। बता देंकि प्राचीन काल से लोग अपनी आस्था को प्रकट करने के लिए भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मंदिर जाते हैं। भारत में कई ऐसे मंदिर हैं, जिनका विशेष महत्व है और उनसे जुड़ी कई कथाएं भी प्रचलित हैं। इसके साथ शास्त्रों में मंदिर से जुड़े कुछ परंपराओं के विषय में भी बताया गया है। जिसमें देवी-देवताओं की परिक्रमा को बहुत ही महत्व दिया गया है।

क्यों की जाती है परिक्रमा

पूजा-पाठ के बाद लोग देवी-देवता या मंदिरों की परिक्रमा करते हैं। लेकिन कई लोगों के मन में यह प्रश्न भी उठता है, कि हम ऐसा क्यों करते हैं? तो बता दें कि देवी-देवताओं की परंपरा प्राचीन काल से चलती आ रही है। इसके पीछे धार्मिक एवं वैज्ञानिक कारण भी छिपे हुए हैं। बता दें, कि जिस दिशा में घड़ी घूमती है उसी दिशा में मनुष्य को परिक्रमा भी करनी चाहिए। ऐसा माना जाता है, कि मंदिरों की परिक्रमा करने से व्यक्ति के अंदर मौजूद नकारात्मक शक्तियां समाप्त हो जाती है, और देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

सबसे लंबी परिक्रमा

सबसे लंबी परिक्रमा, नर्मदा की परिक्रमा को माना गया है। जिसका क्षेत्रफल 2,600 किलोमीटर है। यह यात्रा तीर्थ नगरी अमरकंटक ओमकारेश्वर और उज्जैन से प्रारंभ होती है, और यहीं पर आकर समाप्त हो जाती है। इस परिक्रमा में कई तीर्थ स्थलों के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होता है। खास बात यह है, कि नर्मदा परिक्रमा 3 वर्ष 3 माह और 13 दिनों में पूर्ण होती है। लेकिन कुछ लोग 108 दिनों में ही इस कठिन परिक्रमा को पूरा कर लेते हैं।

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