
How To Control Diabetes:भारत में डायबिटीज के मामलो की सख्या में लगातार हर साल बढ़ोतरी हो रही है।आपको बता दे कि इस बीमारी का कोई खास इलाज नहीं है। केवल इस बीमारी से बचने के लिए इसको कंट्रोल किया जा सकता है। ऐसे में यह जानना भी जरूरी है कि क्या आयुर्वेद से डायबिटीज का इलाज किया जा सकता है. आइए डॉक्टरों से जानते है पूरी डिटेल।
डायबिटीज एक ऐसी बिमारी है अगर यह बिमारी एक बार हो जाए तो इसका कोई इलाज नही है केवल इस बीमारी को काबू किया जा सकता है। डायबिटीज को काबू करने के लिए लोग दवाएं लेते हैं, लेकिन क्या आपको पात है कि आयुर्वेद से भी डायबिटीज का इलाज किया जा सकता है? आपको बता दे कि आयुर्वेद विशेषज्ञ जेएसएस कॉलेज मैसूर की प्रोफेसर बीनाजी राव ने बताया कि विरेचन के जरिए डायबिटीज के रिस्क फैक्टर को कम किया जा सकता है। विरेचन के तहत व्यक्ति को तीन या पांच दिन तक आयुर्वेदिक की औषधि तेल, घी या फिर दोनों को गर्म पानी के साथ मरीज को दिया जाता है। यहां सब करने से शरीर से वह दोष दूर हो जाते हैं जो डायबिटीज के खतरे को बढ़ाते हैं।
डॉ. बीनाजी ने बताया कि डायबिटीज का जोखिम कम करने के लिए साल में कम से कम एक बार शरीर की शुद्धि होना जरूरी है। इसमें विरेचन मददगार साबित हो सकती है. विरेचन चिकित्सा शास्त्र का शब्द है जिसका अर्थ रेचक औषधि के द्वारा शरीर के विकारों की शुद्धि करना होता है. प्रोफेसर बीनाजी राव ने बताया कि इस ट्रीटमेंट के साथ डायबिटीज के मरीजों में एमरी प्लस और बीजीआर-34 जैसी दवाएं भी फायदेमंद मिली हैं।
डायबिटीज मरीज के बढ़ते मामले
भारत में डायबिटीज के मरीजों का आंकड़ा हर साल तेजी से बढ़ रहा है। आपको बता दे कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने हाल ही में एक रिसर्च की थी। जिसमें पता चला है कि देश की 11 फीसदी आबादी डायबिटीज की चपेट में आ सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का आंकलन के अनुसार 2030 तक भारत में 10-12 फीसदी आबादी डायबिटीज से पीड़ित हो सकती है।
आयुर्वेद में डायबटीज का इलाज
एक्सपर्ट्स के अनुसार आयुर्वेद को अपनाकर डायबिटीज के खतरे को कम किया जा सकता है। आयुर्वेद विशेषज्ञ डा. परमेश्वर अरोड़ा ने बताया कि लोगों में 3 तरह की डायबिटीज बीमारी होती है। जिनमें एक जन्म से होता है. और 2 जेनेटिक कारणों के चलते होता है, लेकिन जो डायबिटीज सबसे अधिक होती है वह टाइप-2 है।
डायबटीज का कारण खराब लाइफस्टाइल
डायबटीज के बढ़ते हर साल मामलो का सबसे बड़ा कारण अधिक खराब लाइफस्टाइल और खानपान की गलत आदते हैं। हालांकि आयुर्वेद के जरिए डायबिटीज को आसानी से कट्रोल में किया जा सकता है। और आयुर्वेद से इस बीमारी के लक्षणों को कंट्रोल में रखा जा सकता है। साथ ही शुरुआती दौर में डायबिटीज के होने के रिस्क को भी कम किया जा सकता है।
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