
Sawan 2024: सावन का महीना भागवान शिव को बेहद प्रिय है। सावन मास की शुरुआत 22 जुलाई से हो चुकी है और खास बात ये है कि इस बार सावन का महीना पूरे 29 दिनों का है। ऐसे में भक्तों को भगवान शिव की भक्ति के लिए और उन्हें प्रसन्न कर कृपा पाने का अवसर और ज्यादा मिल पाएगा। ऐसे में भगवान शिव के हर मंदिर में गर्भ गृह में बीच में शिवलिंग और पास में ही नंदी के साथ माथा पार्वती, गणेश और कार्तिकेय जी भी बैठे मिलेंगे। लेकिन, दुनिया का एक ऐसा भी मंदिर है जहां पर भोलेनाथ तो गर्भ गृह में विराजमान हैं और माता पार्वती दरवाजे के बाहर बैठकर उनके बाहर निकलने का इंतजार कर रही है।
बता दें कि द्वापर युग यानी करीब 5300 साल पहले स्थापित प्रसिद्ध गोपेश्वर महादेव मंदिर की। श्रीमद भागवत महापुराण में इस मंदिर और गोपेश्वर महादेव की महिमा का प्रसंग मिलता है। इस प्रसंग में साफ तौर पर कहा गया है कि वृंदावन में स्थापित यह मंदिर उसी समय का है जब भगवान कृष्ण ने महारास रचाया था। भगवान शिव महारास देखने के लिए यहां आए थे। इस महारास में भगवान कृष्ण अकेले पुरुष थे, जबकि उनके साथ लाखों गोपियां थी। भगवान शिव ने भी महारास में घुसने की कोशिश की, लेकिन गोपियों ने उन्हें दरवाजे पर ही रोक दिया। उस समय भगवान शिव ने एक गोपी की ही सलाह पर स्त्री रूप धारण किया था। इसमें उन्होंने साड़ी, नाक में बड़ी सी नथुनी, कानों में बाली और 16 श्रृंगार किया था। जिसके बाद वो महारास में शामिल हुए थे।
गर्भ गृह के बाहर बैठकर इंतजार कर रही हैं माता
दरअसल, भागवत महापुराण के मुताबिक भगवान शिव पहली बार माता पार्वती को बिना बताए कैलाश से बाहर गए थे। इसके बाद वो वृंदावन पहुंच गए थे और उनका पीछा करते हुए माता पार्वती भी वहां पहुंच गई। इसके बाद उन्होंने देखा कि भोलेनाथ गोपी का रूप धार्न कर के महारा में शामिल हो गए है। उन्होंने भी सोचा कि वो भी अंदर जाकर मरारास में शामिल हो जाएं, लेकिन उन्हें डर था कि बाबा तो अंदर जाकर पुरूष से स्त्री बन गए है, अगर वो भी स्त्री से पुरूष बन गई तो क्या होगा। यही सोचकर माता पार्वती बाहर दरवाजे पर ही बैठकर बाबा को बाहर बुलाने लगी थी। तब से भगवान शिव साक्षात गोपेश्वर महादेव के रूप में यहां विराजमान है और गर्भगृह के बाहर माता पार्वती उनके इंतजार में बैठी है।
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