Ganesh Visarjan 2026: गणेश चतुर्थी का त्योहार महाराष्ट्र में ही नहीं बल्कि पूरे देश में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। वहीं, इस साल 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी मनाई गई और लोगों ने पंडाल ही नहीं, बल्कि में भी गणपति की स्थापना की देश के लगभग हर जगह में बप्पा का उत्सव लोग धूमधाम से मनाते है। अब इसके बाद आज, 23 सितंबर को बप्पा के जाने का दिन आ गया है, लेकिन उनका विसर्जन आज ना होकर 25 सितंबर को किया इसकी वजह दिन पंचक का साये को बताया जा रहा है। इसके साथ ही लोगों के मन में कई बड़े सवा भी आते हैं। आईए जानते हैं कि पंचक में क्यों नहीं किया जाता है शुभ काम?
क्या है बड़ी वजह?
पंचांग तिथि के अनुसार गणेश महोत्सव की शुरुआत भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को हुई थी। इसका समापन अनंत चतुर्दशी के दिन किया जाता है और गणपति विसर्जन भी ईसी दिन होता है पंचांग के हिसाब से देखकर तय किया जाता है कि चतुर्दशी वाली तिथि किस दिन पड़ रही है। पंचांग के हिसाब से आज 23 सितंबर द्वादशी तिथि है। इसके बाद त्रयोदशी और फिर चतुर्दशी तिथि आएगी।
25 सितंबर को कब किया जाएगा गणपति विसर्जन
चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 24 सितंबर की रात 11:17 बजे से होगी। ये तिथि 25 सितंबर को रात में 11 बजकर 8 मिनट तक ये तिथि होगी। ऐसे में उदया तिथि को देखते हुए 25 सितंबर के दिन अनंत चतुर्दशी मनाई जाएगी और इसी दिन गणपति विसर्जन भी काफी धूम-धाम से किया जाएगा।
पंचक में भी कर सकते हैं गणपति विसर्जन
पंचक के साये को लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल भी उठते हैं। पंडित की माने तो पंचक का साया जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है और उसकी अस्थियां जलाई जाती हैं उसमें माना जाता है। पंडित कहते हैं कि ये देवताओं पर लागू नहीं होता है। इस वजह से उन पर पंचक का प्रभाव नहीं पड़ता है और इस वजह से आर पंचक के दौरान भी गणपति विसर्जन कर सकते हैं।
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