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बिहार के 1,200 गांवों में जलवायु अनुकूल खेती को मिलेगा बढ़ावा, 27,600 एकड़ में होगा फसल प्रत्यक्षण

बिहार के 1,200 गांवों में जलवायु अनुकूल खेती को मिलेगा बढ़ावा, 27,600 एकड़ में होगा फसल प्रत्यक्षण

Bihar NBihar News:बिहार में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए चतुर्थ कृषि रोड मैप केews:बिहार में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए चतुर्थ कृषि रोड मैप के तहत जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम (CRA) को गति दी जा रही है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य के 24 जिलों के कुल 1,200 गांवों में वैज्ञानिक एवं आधुनिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा दिया जाएगा। वहीं, रबी और गरमा मौसम में कुल 27,600 एकड़ भूमि पर विभिन्न फसलों का प्रत्यक्षण किया जाएगा। कृषि विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए 1,405.51 लाख रुपये (लगभग 14.06 करोड़ रुपये) की राशि की निकासी एवं व्यय की स्वीकृति प्रदान की है।

बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि बाढ़, सुखाड़, अल्पवृष्टि और तापमान में अप्रत्याशित बदलाव कृषि क्षेत्र के सामने गंभीर चुनौतियां हैं। इन परिस्थितियों में खेती को जलवायु अनुकूल बनाना, उत्पादन लागत कम करना और कृषि उत्पादकता बढ़ाना जरूरी है। आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर किसानों की आय को मजबूत करने के साथ कृषि को अधिक टिकाऊ बनाया जा सकता है।

24 जिलों के 1,200 गांवों में लागू होगा कार्यक्रम

कृषि मंत्री ने बताया कि कार्यक्रम के तहत राज्य के 24 जिलों में प्रत्येक जिले से पांच प्राथमिक गांवों का चयन किया जाएगा। इस प्रकार 120 प्राथमिक गांव चिह्नित होंगे। प्रत्येक प्राथमिक गांव के आसपास के नौ द्वितीयक गांवों को भी योजना से जोड़ा जाएगा। इस तरह कुल 1,200 गांवों में जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों का प्रसार किया जाएगा।

इन गांवों में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी, खेतों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण और वैज्ञानिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करते हुए कृषि उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि करना है।

 27,600 एकड़ में विभिन्न फसलों का होगा प्रत्यक्षण

कार्यक्रम के तहत रबी मौसम में 18,000 एकड़ और गरमा मौसम में 9,600 एकड़ भूमि पर फसल प्रत्यक्षण किया जाएगा।

रबी मौसम में 18,000 एकड़ में जीरो टिलेज तकनीक से गेहूं, चना और मसूर की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अलावा रेज्ड बेड तकनीक के माध्यम से मक्का, सरसों, अलसी, मसालों और सब्जियों की खेती का प्रत्यक्षण होगा।

वहीं, गरमा मौसम में 9,600 एकड़ क्षेत्र में मक्का, मूंग, उड़द, मोटे अनाज, सूरजमुखी, तिल, हरी खाद के लिए ढैंचा और सब्जियों की खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा। संतुलित उर्वरक उपयोग के लिए लीफ कलर चार्ट और नियमित मृदा परीक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

720 एकड़ में स्थापित होंगे सीड हब

किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने और बीज उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए सभी 24 चयनित जिलों में 30-30 एकड़ क्षेत्र में सीड हब स्थापित किए जाएंगे। इस प्रकार कुल 720 एकड़ में बीज उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।

योजना के प्रावधानों के अनुसार, बिहार राज्य बीज निगम लिमिटेड किसानों से उत्पादित बीजों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से 30 प्रतिशत अधिक दर पर करेगा। इससे किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और उनकी उपज की बिक्री में सहायता मिलेगी।

सिंचाई, मधुमक्खी पालन और जैविक खाद पर जोर

जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न कृषि योजनाओं को एकीकृत कर किसानों को लाभ पहुंचाया जाएगा। चयनित गांवों में कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे, जिससे कृषि कार्यों में आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता बढ़ेगी।

सरसों उत्पादक क्षेत्रों में प्रति गांव 10 बी-बॉक्स के माध्यम से मधुमक्खी पालन को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ ही 25 एकड़ क्षेत्र में ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई की व्यवस्था और 10 वर्मी कम्पोस्ट इकाइयों की स्थापना की जाएगी। इन पहलों से जल संरक्षण, कृषि संसाधनों के बेहतर उपयोग और जैविक खाद के प्रयोग को प्रोत्साहन मिलेगा।

18 हजार किसानों को मिलेगा खेतों पर प्रशिक्षण

किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के लिए कार्यक्रम के तहत 18,000 किसानों को खेतों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। वहीं, 3,600 किसानों को एक्सपोजर विजिट के माध्यम से उन्नत कृषि पद्धतियों की जानकारी मिलेगी। इसके अलावा बामेती, पटना द्वारा 240 कृषि अधिकारियों एवं कर्मियों को प्रशिक्षित किया जाएगा।

कृषि मंत्री के अनुसार, कार्यक्रम की प्रभावी निगरानी के लिए प्रत्येक फसल प्रत्यक्षण प्लॉट की जियो-टैगिंग और डिजिटल क्रॉप सर्वे कराया जाएगा। डीबीटी पोर्टल पर पंजीकृत 0.5 से 3 एकड़ भूमि वाले पात्र किसानों को योजना के नियमानुसार लाभ दिया जाएगा। कार्यक्रम की प्रगति रिपोर्ट प्रत्येक माह जल-जीवन-हरियाली पोर्टल पर अपलोड की जाएगी। उत्पादन एवं उत्पादकता का आकलन करने के लिए प्रत्येक फसल के कम से कम तीन फसल कटनी प्रयोग भी किए जाएंगे।

जलवायु अनुकूल खेती से मजबूत होगी किसानों की आय

कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प, किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को आधुनिक एवं आत्मनिर्भर बनाने के दृष्टिकोण के अनुरूप है। केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, आधुनिक तकनीकों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि जलवायु के अनुरूप खेती अपनाना भविष्य की तैयारी है। इस कार्यक्रम से किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन हासिल करने, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करने और बदलती जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप खेती करने में मदद मिलेगी। इससे बिहार में कृषि को अधिक टिकाऊ, लाभकारी और जलवायु अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।

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