
नई दिल्ली: हर वर्ष 7 जून को विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस मनाया जाता है. इस दिन को मनाये जाने का महत्वपूर्ण कारण यह है कि खराब भोजन का सेवन करने की वजह से गंभीर रोगों से ग्रस्त लोगों को खाद्य सुरक्षा के प्रति जागरुक करना है. उन लोगों को खाद्य सुरक्षा के प्रति उन लोगों को जागरुक करना है और यह सुनिश्चित करना कि हर व्यक्ति को पर्याप्त मात्रा में सुरक्षित और पौष्टिक भोजन मिल सके. इसके साथ ही इस दिन खाद्य जनित बीमारियों को नियंत्रित करने, पता लगाने और रोकथाम के प्रयास पर रोशनी डाली जाती है.
बता दे कि 20 दिसंबर 2018 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा खाद्य और कृषि संगठन के सहयोग से इस दिन को मनाये जाने की घोषणा की गई थी. यह खाद्य जनित रोगों के संबंध में दुनिया पर पड़ने वाले बोझ को पहचानने और उसे कम करने के लिए किया था. विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं खाद्य और कृषि संगठन इस क्षेत्र से संबंधित अन्य संगठनों के सहयोग से विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस मनाने के लिए मिलकर काम करते हैं. और खाद्य सुरक्षा की दिशा में प्रयासों को मजबूत करने का निर्णय लेते है.
हर वर्ष विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस के दिन आयोजित होने वाले सभी कार्यक्रम तय की गयी विषय पर ही आधारित होते है. विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस के लिए इस साल का विषय ‘स्वस्थ कल के लिए आज का सुरक्षित भोजन’ है. इस विषय का अर्थ सुरक्षित भोजन के उत्पादन और उपभोग पर केंद्रित है. इस वर्ष कोरोना महामारी के कारण सभी कार्यक्रम वर्चुअली आयोजित किये जायेंगे.
खाद्य सुरक्षा खाद्य सामग्री के उपभोग से पहले फसल का उत्पादन, भंडारण और वितरण तक खाद्य श्रृंखला के हर कदम पर नजर रखता है. इसी की वजह से खाद्य सुरक्षा दिवस का महत्व बढ़ जाता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दूषित खाद्य या बैक्टीरिया युक्त खाद्य से हर साल 10 में से एक व्यक्ति बीमार होता है.
कोरोना महामारी के काल में ये दिन और इसका महत्व और भी अहम हो जाता है कोरोना काल में खाने का कितना ध्यान रखना जरूरी है, इसका अंदाजा आप लगा सकते हैं. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए, स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए डॉक्टरों तक ने सलाह दे रखी है.
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