Bihar News:बिहार में किसानों को स्वच्छ और सस्ती बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ी उपलब्धि सामने आई है। प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) योजना के तहत फीडर-लेवल सोलराइजेशन में बिहार पूर्वी भारत का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। राज्य में अब तक 36.261 मेगावाट क्षमता के 13 सौर ऊर्जा संयंत्रों को पावर सब-स्टेशनों से जोड़कर चालू किया जा चुका है। इन संयंत्रों से जुड़े कृषि फीडरों के जरिए 9,449 किसानों को लाभ मिल रहा है। ऊर्जा विभाग की ओर से 12 अक्टूबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकार की सब्सिडी से सौर ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार को गति मिल रही है। इससे कृषि क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलने के साथ बिजली आपूर्ति व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद है।
बिहार में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार के तहत 12 अक्टूबर को बांका जिले के शंभूगंज पावर सब-स्टेशन से 5.155 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र को सफलतापूर्वक ग्रिड से जोड़ा गया। इस संयंत्र के चालू होने से शंभूगंज पावर सब-स्टेशन से जुड़े 2,007 किसानों को हरित ऊर्जा का लाभ मिलेगा। इस परियोजना से कृषि फीडरों के लिए बिजली उपलब्ध कराने में सौर ऊर्जा की भूमिका बढ़ेगी। सरकार का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करना और बिजली व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाना है। इस तरह की परियोजनाओं के विस्तार से किसानों तक स्वच्छ ऊर्जा पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
केंद्र और राज्य सरकार से मिल रही 1.50 करोड़ रुपये की सब्सिडी
पीएम-कुसुम योजना के तहत फीडर-लेवल सोलराइजेशन परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और बिहार सरकार की ओर से सब्सिडी दी जा रही है। प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, प्रति मेगावाट सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना पर केंद्र सरकार से 1.05 करोड़ रुपये और राज्य सरकार से 45 लाख रुपये की सब्सिडी उपलब्ध है। इस तरह कुल सब्सिडी 1.50 करोड़ रुपये प्रति मेगावाट बताई गई है। ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल ने कहा कि किसानों को सस्ती, सुलभ और स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि सब्सिडी से सौर ऊर्जा परियोजनाओं को प्रोत्साहन मिल रहा है और अधिक किसानों तक इसका लाभ पहुंचाने में मदद मिलेगी।
बिहार में इन 13 जगहों पर चालू हुए सौर ऊर्जा संयंत्र
बिहार में पीएम-कुसुम योजना के तहत आमस (गया) में 7 मेगावाट, अतौला (अरवल) में 1.948 मेगावाट, मांझी (सारण) में 2.480 मेगावाट और करपी (अरवल) में 1.294 मेगावाट क्षमता के सौर संयंत्र चालू हैं। इसके अलावा कचना (नवादा) में 2.066 मेगावाट, रोह (नवादा) में 1.470 मेगावाट, शेखपुरा में 0.660 मेगावाट, बरेव (नवादा) में 1.465 मेगावाट, पाखनपुर (जहानाबाद) में 7.783 मेगावाट, सुंदरगामा (सीतामढ़ी) में 1.080 मेगावाट, कर्णा (खगड़िया) में 1 मेगावाट, सुगौली (मोतिहारी) में 2.860 मेगावाट और शंभूगंज (बांका) में 5.155 मेगावाट क्षमता के संयंत्र शामिल हैं। ऊर्जा विभाग के सचिव एवं BSPHCL के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक अजय यादव ने कहा कि भविष्य में बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) जैसी आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से बिजली व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।
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