सनातन धर्म में ‘अधिक मास’ का है बेहद खास महत्त्व, इस दिन भूलकर भी ना करें ये गलतियां

सनातन धर्म में ‘अधिक मास’ का है बेहद खास महत्त्व, इस दिन भूलकर भी ना करें ये गलतियां

Adhik Maas 2023 Last Sunday :सनातन धर्म में अधिक मास का विशेष महत्व होता है और इस मास में भगवान विष्णु की पूजा और आराधना की जाती है। यह मास ज्येष्ठ (जून-जुलाई) माह के बाद आता है और कार्तिक मास (अक्टूबर-नवंबर) में समाप्त होता है। इसका उपनाम "अधिक मास" या "मलमास" होता है।

हर 3 साल में बनता है अधिक मास

अधिक मास हर 3 साल में बनता है और उसी महीने में आने में 19 साल का समय लगता है। अब श्रवण अधिक मास का यह संयोग पूरे 19 साल बाद बनेगा। आज अधिक मास का अंतिम रविवार है और इस दिन भूलकर भी कुछ काम ऐसे हैं जिन्हें करने की मनाही होती है।

इस भगवान की होती है पूजा

अधिक मास की पूजा विशेष भक्ति और आराधना का माह होता है, जिसमें भगवान विष्णु की कृपा को प्राप्त करने का अवसर मिलता है। इस मास में विशेष धार्मिक क्रियाएँ, पूजा, पाठ, दान, व्रत आदि की जाती है। भक्तों के लिए यह एक अद्वितीय अवसर होता है जिसमें वे अपनी आराधना को अधिक दृढ़ता और समर्पण के साथ करते हैं।

यह माना जाता है कि इस मास में भगवान विष्णु स्वयं स्थिति में आते हैं और अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। यह एक स्पेशल समय होता है जब विशेष आराधना, पूजा, भजन और ध्यान के माध्यम से व्यक्ति अपने आध्यात्मिक सफर को आगे बढ़ा सकते हैं।

अधिक मास के दिनों में विशेष आराधना और पूजा की जाती है, लेकिन कुछ गलतियां भक्ति और पूजा में हो सकती हैं, जिन्हें आपको ध्यान में रखना चाहिए:

  • अनधिकृत आचरण:अधिक मास में धार्मिक क्रियाएँ करते समय, आपको समाजिक और आचारिक नियमों का पालन करना चाहिए। अनधिकृत आचरण जैसे कि अशुभ क्रियाएँ या बिना संयम के आहार लेना, गलत हो सकता है।
  • भक्ति में बहुमतपंथीयता:अधिक मास में भक्ति और पूजा करते समय, आपको अपने मन और आत्मा की शुद्धि पर केंद्रित रहना चाहिए। यह गलत हो सकता है कि आप भक्ति में इतनी बहुमतपंथीयता में फंस जाएं कि आप दूसरों की आराधना को नकारने लगें।
  • मानसिक दृष्टि की कमी:अधिक मास में भगवान की आराधना मानसिक शुद्धि और ध्यान के साथ की जाती है। अगर आपकी मानसिकता सही नहीं है, तो आपकी पूजा और आराधना में कमी हो सकती है।
  • कृत्रिमता:अधिक मास में आपको अपनी पूजा और आराधना में सहजता और सादगी बनाए रखनी चाहिए। कृत्रिमता या दिखावटी आराधना से बचना चाहिए।
  • अभिमान और अभावनाओं का आसर: आपको अपने भक्ति में गर्व या अभिमान की अनुमति नहीं देनी चाहिए। अधिक मास में, यह महत्वपूर्ण है कि आप विनम्रता, समर्पण और सच्ची भावनाओं के साथ आराधना करें।

इन गलतियों से बचकर, आप अधिक मास के समय को मानसिक शांति, आध्यात्मिक साक्षात्कार और भक्ति के लिए सही तरीके से उपयोग कर सकते हैं। यदि आप विशेष ध्यान और आत्म-निग्रह के साथ इसे मनाते हैं, तो यह आपके आध्यात्मिक अनुभव को मजबूती और गहराई दे सकता है।

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