ओवैसी ने खोली पाक की पोल, कहा - जेल में बंद लखवी बना बाप, यह है असली आतंकवाद नीति

ओवैसी ने खोली पाक की पोल, कहा - जेल में बंद लखवी बना बाप, यह है असली आतंकवाद नीति

Asaduddin Owaisi On Pakistan Terrorist Lakhvi: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने शनिवार को अल्जीरिया में एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की आतंकवाद को लेकर दोहरी नीति की कड़ी आलोचना की। ओवैसी ने आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के सरगना जकीउर रहमान लखवी का जिक्र करते हुए कहा कि वह 'पाकिस्तानी जेल में रहते हुए एक बेटे का बाप बन गया।' उनके इस बयान से पाकिस्तान की जेलों में आतंकवादियों को मिलने वाली कथित सुविधाओं पर सवाल उठने लगे।

असदुद्दीन ओवैसी का बयान

असदुद्दीन ओवैसी ने शनिवार 31मई को अल्जीरिया में एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने साल 2008के मुंबई हमले के मास्टरमाइंड जकीउर रहमान लखवी का ज़िक्र करते हुए कहा 'पाकिस्तान में आतंकवादी जेल में बैठकर ऐश कर रहे हैं। लखवी जेल में था, फिर भी वह एक बेटे का बाप बन गया। यह कैसे संभव है? उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि पाकिस्तान की जेलें आतंकवादियों के लिए मेहमानखाने जैसी हैं, जहां उन्हें विशेष सुविधाएं दी जाती हैं।

पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाला

ओवैसी ने अपने बयान में यह भी कहा कि जब तक पाकिस्तान को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की ग्रे लिस्ट में नहीं डाला गया था। तब तक उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। लेकिन जब ये हुआ, तभी लखवी के खिलाफ मुकदमे में तेजी आई। उन्होंने पाकिस्तान के दोहरे रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई का दावा तो करता है, लेकिन हकीकत में आतंकियों को संरक्षण देता है। 

बता दें, FATF आतंकवाद के वित्तपोषण और मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने के लिए वैश्विक स्तर पर काम करता है। पाकिस्तान को 2018में FATF की ग्रे लिस्ट में डाला गया था। जिसके बाद उसने आतंकवादियों के खिलाफ कुछ कार्रवाइयां शुरू कीं।

कौन हैं जकीउर रहमान लखवी?

बता दें, जकीउर रहमान लखवी लश्कर-ए-तैयबा का प्रमुख कमांडर है। उसे 26/11 मुंबई हमले का मुख्य साजिशकर्ता माना जाता है। इस हमले में 166 लोग मारे गए थे और सैकड़ों घायल हुए थे। लखवी को साल 2008 में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन 2015 में उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया। जिसकी भारत और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने कड़ी निंदा की थी।

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