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गहराती जा रही आर्थिक खाई...अमीर देशों की रफ्तार तेज, गरीब पीछे; UN की रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े

गहराती जा रही आर्थिक खाई...अमीर देशों की रफ्तार तेज, गरीब पीछे; UN की रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े

Economic Gap Report UN: संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि अमीर और गरीब देशों के बीच आर्थिक खाई तेजी से बढ़ रही है। पिछले साल स्पेन के सेविले में अपनाए गए सेविले कमिटमेंट के तहत वादे किए गए थे कि वैश्विक वित्तीय संस्थाओं में सुधार कर गरीब देशों की मदद बढ़ाई जाएगी और 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को हासिल किया जाएगा, लेकिन ये वादे अब तक सिर्फ कागजों पर सिमटकर रह गए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में 25 देशों ने गरीब देशों को विकास सहायता घटा दी, जिससे कुल सहायता में 23 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई, यह पिछले कई दशकों में सबसे तेज गिरावट है। अमेरिका में तो यह कमी 59 प्रतिशत तक पहुंच गई। 2026 में और 5.8 प्रतिशत की और गिरावट की आशंका जताई जा रही है।  

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रिपोर्ट में और क्या-क्या

1. World Inequality Report 2026 (जिसे UNDP का समर्थन प्राप्त है) के मुताबिक, दुनिया की सबसे अमीर 0.001 प्रतिशत आबादी (केवल 56,000 से 60,000 लोग) के पास गरीब आधी आबादी (लगभग 4 अरब लोग) से तीन गुना ज्यादा संपत्ति है।

2. वैश्विक आय का टॉप 10 प्रतिशत लोगों के पास कुल आय से ज्यादा हिस्सा है, जबकि सबसे गरीब 50 प्रतिशत लोगों के पास कुल वैश्विक आय का मात्र 10 प्रतिशत से भी कम हिस्सा है।

3. संपत्ति में असमानता और भी गंभीर है टॉप 10 प्रतिशत के पास 75 प्रतिशत वैश्विक संपत्ति है, जबकि सबसे नीचे के 50 प्रतिशत के पास सिर्फ 2 प्रतिशत।

4. उत्तर अमेरिका और यूरोप जैसे अमीर क्षेत्रों में औसत संपत्ति विश्व औसत से कई गुना ज्यादा है, जबकि सहारा के दक्षिणी अफ्रीका, दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे क्षेत्र विश्व औसत से बहुत नीचे हैं। उदाहरण के लिए, उत्तर अमेरिका-ओशिनिया में औसत संपत्ति विश्व औसत की 338 प्रतिशत है, जबकि सहारा अफ्रीका में सिर्फ 20 प्रतिशत।

रिपोर्ट में व्यापार बाधाओं में बढ़ोतरी, जलवायु परिवर्तन से होने वाले बार-बार के झटकों और वैश्विक वित्तीय व्यवस्था को भी इस बढ़ती खाई का कारण बताया गया है। गरीब देशों से अमीर देशों की ओर हर साल लगभग 1 प्रतिशत वैश्विक जीडीपी के बराबर धन का नेट ट्रांसफर हो रहा है, जो गरीब देशों की विकास क्षमता को और कमजोर कर रहा है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक वित्तीय संस्थाओं (IMF और World Bank) में सच्चा सुधार, विकास सहायता बढ़ाना, कर्ज के बोझ को कम करना और व्यापार नियमों को अधिक न्यायपूर्ण बनाना जरूरी है।

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