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सोनिया ने अरबों के ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को बताया सुनियोजित दुस्साहस, कहा- आदिवासियों के लिए खतरा...

सोनिया ने अरबों के ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को बताया सुनियोजित दुस्साहस, कहा- आदिवासियों के लिए खतरा...

Sonia Gandhi On Great Nicobar Project: कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने ग्रेट निकोबार मेगा-इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना को ‘सुनियोजित दुस्साहस’ करार देते हुए इसकी कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे द्वीप के स्वदेशी निकोबारी और शोम्पेन जनजातियों के लिए अस्तित्व का संकट बताया।

सोनिया ने स्ठानीय न्यूजपेपर में प्रकाशित अपने लेख में कहा कि यह 72,000 करोड़ रुपये की परियोजना न केवल आदिवासियों को विस्थापित करेगी, बल्कि विश्व के अनूठे पारिस्थितिक तंत्र  को भी नष्ट करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि परियोजना को असंवेदनशील ढंग से लागू किया जा रहा है, जिसमें कानूनी और परामर्श प्रक्रियाओं की अनदेखी की गई है। निकोबारी आदिवासियों के पैतृक गांव, जो 2004 की सुनामी के बाद विस्थापन का दंश झेल चुके हैं, अब इस परियोजना के कारण स्थायी रूप से उजड़ने के कगार पर हैं।

कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन

सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर संवैधानिक और वैधानिक निकायों को दरकिनार करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग और जनजातीय परिषद से परामर्श नहीं किया, जो संविधान के अनुच्छेद 338-ए के तहत अनिवार्य है।

इसके अलावा, जनजातीय परिषद के अध्यक्ष की निकोबारी आदिवासियों को उनके पैतृक गांवों में लौटने की मांग को भी नजरअंदाज किया गया। कांग्रेस नेता जयराम रमेश और राहुल गांधी भी इस परियोजना को पर्यावरण और आदिवासी अधिकारों के लिए हानिकारक बता चुके हैं। राहुल ने हाल ही में जनजातीय मामलों के मंत्री को पत्र लिखकर वन अधिकार अधिनियम के उल्लंघन पर चिंता जताई थी।

परियोजना का स्वरूप और आलोचना

‘ग्रेट निकोबार का समग्र विकास’ परियोजना में एक ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, टाउनशिप और 160वर्ग किलोमीटर में फैला बिजली संयंत्र शामिल है। सोनिया ने इसे ‘अधूरी और बिना सोचे-समझे नीति-निर्माण’ का उदाहरण बताते हुए मोदी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने चेतावनी दी कि यह परियोजना प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील क्षेत्र में तबाही ला सकती है।

राहुल गांधी ने भी सोनिया के लेख को साझा करते हुए केंद्र की आलोचना की और इस अन्याय को रोकने की अपील की। यह विवाद न केवल पर्यावरणीय चिंताओं को उजागर करता है, बल्कि आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होने की जरूरत को भी रेखांकित करता है।

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