Haryana News:हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले की कनीना अनाज मंडी में बाजरे की खरीद से जुड़े रिकॉर्ड की जांच के दौरान अनियमितताओं की आशंका सामने आने के बाद दो अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है। हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के मुख्य प्रशासक धर्मेंद्र सिंह ने मार्केट कमेटी के सहायक सचिव अजीत कुमार यादव और मंडी सुपरवाइजर कुलदीप सिंह को निलंबित कर दिया है। जांच में गेट पास के रिकॉर्ड में खामियां मिलने के साथ बाजरे की खरीद अधिक और उपलब्ध स्टॉक कम होने की आशंका भी सामने आई है। हालांकि, मामले में जांच के अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आए हैं।
जानकारी के अनुसार, कनीना अनाज मंडी में बाजरे की आवक, खरीद और स्टॉक से संबंधित रिकॉर्ड की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की गई थी। टीम में जींद जिले के डीएमईओ श्रीभगवान मुदगिल, लेखाकार सुरेंद्र पूनिया और मंडी सुपरवाइजर जयभगवान शामिल थे। टीम ने मंडी पहुंचकर दस्तावेजों और गेट पास से जुड़े रिकॉर्ड का निरीक्षण किया। जांच के दौरान रिकॉर्ड में कुछ विसंगतियां सामने आईं, जिसके बाद रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को सौंपी गई। इसके आधार पर दोनों अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई।
खरीद और स्टॉक के आंकड़ों में भी अंतर की आशंका
जांच के दौरान बाजरे की खरीद के रिकॉर्ड और मंडी में उपलब्ध वास्तविक स्टॉक के बीच अंतर होने की आशंका जताई गई है। इसके अलावा, गेट पास जारी करने की प्रक्रिया में भी अनियमितताएं सामने आईं। मंडी में गेट पास का रिकॉर्ड फसल की आवक और खरीद का हिसाब रखने के लिए महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में रिकॉर्ड में गड़बड़ी मिलने पर खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि कथित अनियमितताओं के पीछे क्या कारण थे और इससे सरकारी खरीद व्यवस्था पर कितना असर पड़ा। इन सवालों का जवाब विस्तृत जांच के बाद ही मिल सकेगा।
निलंबन के बाद पंचकूला मुख्यालय में देनी होगी हाजिरी
निलंबन आदेशों के अनुसार, दोनों अधिकारियों का मुख्यालय हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड, पंचकूला निर्धारित किया गया है। उन्हें सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी। इस बीच कनीना मार्केट कमेटी में सहायक सचिव के पद पर जितेंद्र सिंह ने कार्यभार संभाल लिया है। मंडी में बाजरे की खरीद जारी रहने के बीच प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा व्यवस्थाओं का निरीक्षण भी किया जा रहा है। अब आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और संबंधित अधिकारियों के जवाब के आधार पर तय होगी।


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