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यमुना स्वच्छता के लिए दिल्ली सरकार का बड़ा संकल्प, 'ग्रीन बजट' का बड़ा हिस्सा यमुना सफाई के लिए आवंटित

यमुना स्वच्छता के लिए दिल्ली सरकार का बड़ा संकल्प, 'ग्रीन बजट'  का बड़ा हिस्सा यमुना सफाई के लिए आवंटित

Delhi News: दिल्ली की उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार आईएसबीटी, कश्मीरी गेट के सामने स्थित वासुदेव घाट तथा हनुमान मंदिर के सामने स्थित यमुना बाजार घाट का निरीक्षण किया। इस दौरान घाटों की स्वच्छता व्यवस्था, आधारभूत ढांचे के विकास तथा यमुना पुनर्जीवन से जुड़े चल रहे कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य यमुना रिवरफ्रंट विकास की प्रगति की समीक्षा करना और आगामी मानसून व ग्रीष्मकालीन चुनौतियों के लिए विभागों की तैयारियों का जायजा लेना था।

दोनों स्थलों का निरीक्षण करने के बाद उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री ने वासुदेव घाट, जिसे दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) द्वारा विकसित किया गया है और यमुना बाजार घाट के बीच के स्पष्ट अंतर को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि वासुदेव घाट, असिता, बनसेरा और यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क जैसे विकसित घाट अब पर्यावरण-अनुकूल, सतत और हरित सार्वजनिक स्थलों के रूप में उभर चुके हैं। वहीं, कई अन्य घाटों को भी डीडीए द्वारा अन्य विभागों/एजेंसियों के सहयोग से इसी प्रकार विकसित किए जाने की आवश्यकता है।

निरीक्षण के दौरान माननीय उपराज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ने यमुना के किनारे विकसित किए जा रहे घाटों, हरित क्षेत्रों, वॉकिंग ट्रेल्स, जैव-विविधता क्षेत्रों तथा सफाई कार्यों में लगी आधुनिक मशीनरी का अवलोकन किया। उन्होंने नदी तटों पर किए जा रहे ग्रीनवे विकास, कच्चे वॉकिंग एवं साइक्लिंग ट्रैक, नदी किनारे पौधारोपण, वेटलैंड्स के पुनर्स्थापन और प्राकृतिक जलधाराओं के संरक्षण जैसे कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की। Also read: महाठग सुकेश चंद्रशेखर को राउज एवेन्यू कोर्ट से मिली जमानत, अभी जेल से नहीं आ पाएगा बाहर

इस अवसर पर अधिकारियों द्वारा यमुना फ्लडप्लेन पुनर्स्थापन परियोजनाओं की विस्तृत प्रस्तुति भी दी गई, जिसमें वजीराबाद से ओखला तक फैले क्षेत्र में विभिन्न चरणों में किए जा रहे विकास कार्यों की जानकारी साझा की गई। साथ ही यमुना नदी के किनारों को पारिस्थितिक रूप से पुनर्जीवित करने, जैव-विविधता को बढ़ावा देने, प्रदूषण को कम करने जैसे कार्यों की जानकारी भी साझा की गई।

जन-संवाद से निकला समाधान का मार्ग

माननीय उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू ने बताया कि यह निरीक्षण पिछले एक महीने के दौरान नागरिकों के साथ हुए 'औचक संवाद' का परिणाम है। दिल्लीवासियों ने यमुना प्रदूषण, वायु प्रदूषण, मानसून में बाढ़ और गर्मियों में जल संकट जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था। उपराज्यपाल ने कहा कि हमारा शासन जन-केंद्रित है। नागरिकों के फीडबैक के आधार पर ही हम पल्ला से कालिंदी कुंज तक के संपूर्ण बाढ़ क्षेत्र के समयबद्ध पुनर्जीवन की दिशा में बढ़ रहे हैं।

निरीक्षण के बाद माननीय उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री ने सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग, दिल्ली जल बोर्ड, डीपीसीसी और एमसीडी सहित सभी संबंधित विभागों को समन्वित रूप से कार्य करने के निर्देश दिए। साथ ही सभी विभागों को एक विस्तृत प्रस्तुति तैयार करने को कहा गया है, जिसमें स्पष्ट लक्ष्य और उनके कार्यान्वयन की समय-सीमा तय होगी। माननीय उपराज्यपाल द्वारा यमुना और वायु प्रदूषण के समाधान को समझौता न करने वाली प्राथमिकताबताते हुए इसे मिशन मोड में चलाने का आदेश दिया गया। 

वैश्विक विशेषज्ञता और केंद्र का सहयोग

उपराज्यपाल महोदय ने उल्लेख किया कि यमुना पुनर्जीवन अब माननीय प्रधानमंत्री और माननीय गृहमंत्री जी की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकार अब इन परियोजनाओं में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ सक्रिय सहयोग करेगी ताकि वैश्विक स्तर के नवाचारों और सफल मॉडलों को दिल्ली में लागू किया जा सके।

यमुना स्वच्छता: दिल्ली सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार पहले दिन से ही मां यमुना की स्वच्छता और पुनर्जीवन के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का संकल्प एक स्वच्छ, सुंदर और हरित दिल्ली का निर्माण करना है, जिसमें यमुना नदी की पुनर्स्थापना एक प्रमुख प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2026-27 के बजट का उल्लेख करते हुए बताया कि दिल्ली सरकार का 22,236 करोड़ का रुपये ग्रीन बजटकुल बजट का लगभग 21.44 प्रतिशत है, जो प्रत्यक्ष रूप से पर्यावरणीय योजनाओं, विशेषकर यमुना सफाई से संबंधित पहलों के लिए निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि मां यमुना की स्वच्छता केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि सरकार का दृढ़ संकल्प है। इसी उद्देश्य से दिल्ली जल बोर्ड को ग्रीन बजट का सबसे बड़ा हिस्सा आवंटित किया गया है, ताकि सीवेज ट्रीटमेंट और डी-सिल्टिंग से संबंधित कार्यों में किसी प्रकार की वित्तीय बाधा उत्पन्न न हो।

मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि नदी की वॉटर होल्डिंग क्षमता बढ़ाने के लिए बाढ़ क्षेत्र से अतिक्रमण को तत्काल हटाया जाए। इसके साथ ही, तीन-स्तरीय एजेंडा के अंतर्गत डी-सिल्टिंग, जल प्रवाह को सुचारु बनाना तथा जलभराव वाले हॉटस्पॉट्स का स्थायी समाधान सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक वर्ष अस्थायी घाटों पर व्यय करने के स्थान पर यमुना तटों को स्थायी एवं भव्य सार्वजनिक परिसंपत्तियों के रूप में विकसित किए जाने पर भी विशेष बल दिया गया।

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यमुना का पुनर्जीवन एक दीर्घकालिक एवं सतत प्रक्रिया है, जिसके लिए निरंतर प्रयास, जनसहभागिता तथा प्रभावी प्रबंधन आवश्यक है, ताकि भविष्य में जलभराव जैसी समस्याओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके और राजधानी को एक स्वच्छ, सुदृढ़ एवं जीवंत नदी तंत्र प्रदान किया जा सके।

बुनियादी ढांचे और पारिस्थितिकी पर जोर

निरीक्षण के दौरान माननीय एलजी और मुख्यमंत्री ने वजीराबाद से ओखला तक चल रहे फ्लडप्लेन रेस्टोरेशन के कार्यों का अवलोकन किया। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि यमुना तटों पर ग्रीनवे विकास, वेटलैंड्स संरक्षण और जैव-विविधता पार्कों के निर्माण में तेजी लाई जाए, नदी के किनारे कच्चे वॉकिंग और साइक्लिंग ट्रैक्स को इस तरह विकसित किया जाए कि नदी का प्राकृतिक स्वरूप सुरक्षित रहे, साथ ही घाटों को अलग-अलग टुकड़ों के बजाय एक 'कंटीन्यूअस स्ट्रेच' के रूप में जोड़कर विकसित किया जाए।

सख्त मॉनिटरिंग और समयबद्धता

निरीक्षण के अंत में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, सीवेज नियंत्रण और अवैध कचरा निस्तारण पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाए। उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री ने संयुक्त रूप से कहा कि यमुना के किनारे विकसित हो रहे इन क्षेत्रों को पर्यावरण-अनुकूल और सस्टेनेबल बनाया जाए ताकि ये स्थान न केवल प्रकृति को समृद्ध करें, बल्कि जनता के लिए आकर्षण का केंद्र भी बनें।

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