Supreme Court:सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार यानी 13 अप्रैल को साफ शब्दों में कहा कि पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनावों की नतीजों पर तब तक विचार नहीं किया जाएगा, जब तक हार-जीत का अंतर मतदाता सूचियों के विशेष गहण पुनरिक्षण के दौरान बाहर किए गए लोगों की संख्या कम न हो।
मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि बंगाल के मतदाता दो संस्थाओं के बीच पिस रहे हैं। वहीं, जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि पश्चिम बंगाल में मतदाता अब अलग-अलग संवैधानिक संस्थाओं के बीच पिस रहे हैं।
जस्टिस बागची की टिप्पणी
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस बागची ने कहा कि चुनावी नतीजों में दखल नहीं दिया जा सकता है, जब तक की हार अंतर SIR में बाहर किए गए मतदाताओं की संख्या से ज्यादा न हो। उन्होंने कहा कि अगर 10 फीसदी लोग वोट नहीं डालते हैं और जीत का अंतर 10 फीसदी से ज्यादा है, तो चिंता की बात नहीं है अगर अंतर 5 फीसदी से कम है, तो हमें इस पर गंभीरता से विचार करना होगा। पहले अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष किसी उम्मीदवार को प्राथमिकता दी जाता थी। क्योंकि किसी प्रत्याशी को चुनाव लड़ने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है।
चुनाव आयोग से भी सवाल
जस्टिस बागची ने चुनाव आयोग से कहा कि यह न सोचे कि हमारे मन में यह सवाल नहीं है कि उन लोगों का क्या होगा जिन्हें मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया है। जस्टिस बागची ने पश्चिम बंगाल और बिहार में हुए एसआईआर के बीच अंतरों को रेखांकित किया है। उन्होंने कहा कि हमने संवैधानिक संस्था को मतदाता सूची की शुद्धता के मुद्दे को जांच करने की परमिशन दी है। एसआईआर पर आपकी मूल चुनाव आयोग अधिसूचना में 2002 की सूची का जिक्र नहीं था।