Uttarakhand News: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सख्त कानून व्यवस्था और जनभावनाओं के सम्मान के दावों के बीच काशीपुर का चैती चौराहा इन दिनों उबाल पर है। यहां हाल ही में खुली विदेशी मदिरा की दुकान ने पूरे इलाके का माहौल गर्म कर दिया है, जहां पिछले दो दिनों से लगातार विरोध प्रदर्शन जारी है।
स्थानीय महिलाओं और युवाओं ने इस दुकान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनका साफ कहना है कि धार्मिक और अत्यधिक भीड़भाड़ वाले इस क्षेत्र में शराब की दुकान किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दो दिन पहले छात्रसंघ अध्यक्ष जतिन शर्मा और स्थानीय महिलाओं ने मौके पर पहुंचकर आबकारी विभाग के निरीक्षक को बुलाया और दुकान बंद कराने की मांग उठाई, लेकिन इसके बावजूद दुकान का संचालन जारी रहने से लोगों का गुस्सा भड़क उठा।
बीते दिन यह विरोध उग्र हो गया, जब गुस्साई महिलाओं ने दुकान के बाहर सड़क जाम कर दी। देखते ही देखते पूरा इलाका जाम में तब्दील हो गया और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालात इतने बिगड़ गए कि पुलिस और प्रशासन को स्थिति संभालने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
इसी बीच विवाद ने नया मोड़ तब ले लिया जब एक भाजपा नेत्री का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो में कथित तौर पर वह नेत्री शराब की दुकान के अंदर घुसकर बोतलें तोड़ती नजर आ रही हैं। इस घटना ने पूरे मामले को और ज्यादा तूल दे दिया है और अब यह विवाद राजनीतिक रंग भी लेता दिखाई दे रहा है। प्रदर्शन कर रही महिलाओं का कहना है कि इस दुकान से न सिर्फ क्षेत्र का धार्मिक और सामाजिक माहौल खराब होगा, बल्कि युवाओं पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ेगा। उनका आरोप है कि प्रशासन जनभावनाओं को नजरअंदाज कर रहा है।
जांच के आधार पर आगे की जाएगी कार्रवाई
मामले पर आबकारी निरीक्षक दिवाकर चौधरी ने बताया कि विभाग ने पूरे घटनाक्रम का संज्ञान लिया है और संबंधित भाजपा नेत्री के खिलाफ आईटीआई कोतवाली में तहरीर दी गई है। वहीं, दुकान संचालक की ओर से भी शिकायत दर्ज कर कार्रवाई की मांग की गई है। सीओ बाजपुर विभव सैनी के मुताबिक पुलिस को दोनों पक्षों से तहरीर मिल चुकी है और मामले में जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कानून व्यवस्था हर हाल में बनाए रखी जाएगी।
चैती चौराहे का माहौल बना संवेदनशील
फिलहाल, चैती चौराहे का माहौल संवेदनशील बना हुआ है और स्थानीय लोग अपनी मांगों पर अड़े हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है। क्या प्रशासन इस विवादित दुकान पर कोई ठोस फैसला लेगा या फिर काशीपुर की सड़कों पर यूं ही विरोध और टकराव का दौर जारी रहेगा?