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भारत के कई शहरों में Diet Coke की भारी कमी, गर्मियों में बढ़ी परेशानी; जानें क्या है इसकी वजह?

Shivani Jha | 22 Apr, 2026

India Diet Coke Crisis: मुंबई, बेंगलुरु, पुणे और दिल्ली-एनसीआर जैसे बड़े शहरों में इस गर्मी के मौसम में लोगों को Diet Coke खरीदने में दिक्कत हो रही है। कई दुकानों और सुपरमार्केट में यह ड्रिंक या तो खत्म हो चुकी है या बहुत कम मात्रा में मिल रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसकी सबसे बड़ी वजह एल्यूमिनियम कैन की कमी बताई जा रही है। यह कमी वैश्विक सप्लाई चेन में आई रुकावटों और मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव, खासकर ईरान से जुड़े हालात के कारण हुई है। इसी वजह से भारत में कैन आधारित ड्रिंक्स की सप्लाई प्रभावित हो रही है।

डाइट कोक की बिक्री भारत में तेजी से बढ़ रही थी, लेकिन यह पूरी तरह कैन पैकेजिंग पर निर्भर है। जबकि अन्य कोल्ड ड्रिंक्स जैसे कोका-कोला, थम्स अप और पेप्सी बोतल और ग्लास में भी मिल जाते हैं, जिससे उनकी सप्लाई ज्यादा स्थिर रहती है। इसी कारण Diet Coke पर असर ज्यादा दिख रहा है।

गर्मियों में बढ़ रही मांग

रिटेलर्स का कहना है कि जैसे ही कुछ स्टॉक आता है, वह तुरंत बिक जाता है। खासकर गर्मियों में इसकी मांग बहुत ज्यादा बढ़ गई है। कई शहरों में लोग एक साथ ज्यादा मात्रा में खरीद रहे हैं, जिससे बाजार में और कमी हो रही है। कंपनियां इस कमी को पूरा करने के लिए विदेशों से कैन आयात कर रही हैं, जैसे यूएई, श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशिया। लेकिन आयातित कैन 25–30% तक महंगे पड़ रहे हैं, जिससे लागत बढ़ रही है।

सप्लाई पर बढ़ रहा दबाव

सप्लाई संकट सिर्फ कैन तक सीमित नहीं है। ग्लास बोतल और पैकेजिंग मटेरियल की कीमतें भी बढ़ी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ फैक्ट्रियां अपनी क्षमता के सिर्फ 25% पर काम कर रही हैं या अस्थायी रूप से बंद भी हो गई हैं। इसी बीच, लो-सुगर और डाइट ड्रिंक्स की मांग पिछले एक साल में दोगुनी हो गई है, जिससे सप्लाई पर और दबाव बढ़ा है। कई लोग अब ऑनलाइन क्विक कॉमर्स ऐप्स से भी bulk में खरीदारी कर रहे हैं।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ? 

इंडस्ट्री से जुड़े संगठनों ने सरकार से आयात शुल्क में राहत की मांग की है ताकि एल्यूमिनियम कैन और अन्य पैकेजिंग सामान आसानी से उपलब्ध हो सके। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह सप्लाई संकट जल्द नहीं सुधरा, तो आने वाले महीनों में कोल्ड ड्रिंक मार्केट पर और बड़ा असर पड़ सकता है, खासकर गर्मियों की चरम मांग के दौरान। 

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