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Mahashivratri 2026: इस बार महाशिवरात्रि पर बन रहे दुर्लभ ग्रह संयोग, रात की साधना से मिलेगा विशेष फल

Parth Jha | 13 Feb, 2026

Mahashivratri 2026 Special: इस साल की महाशिवरात्रि बेहद खास और दुर्लभ संयोगों से युक्त होने वाली है। हिंदू पंचांग के अनुसार, महाशिवरात्रि फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है, जो इस बार रविवार 15फरवरी 2026को पड़ रही है। यह पर्व भगवान शिव की आराधना, व्रत और रात्रि जागरण के लिए जाना जाता है, लेकिन 2026में ग्रहों के कई दुर्लभ संयोग इसे और भी शक्तिशाली बना रहे हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दिन सूर्य, बुध, शुक्र और अन्य ग्रहों के विशेष योग बन रहे हैं, जो कुछ राशियों के लिए राजयोग, लक्ष्मी-नारायण योग और आर्थिक-करियर उन्नति के योग बना रहे हैं।

महाशिवरात्रि 2026की मुख्य तिथि और समय

चतुर्दशी तिथि प्रारंभ:15फरवरी 2026, शाम 5:04बजे

चतुर्दशी तिथि समाप्त:16फरवरी 2026, शाम 5:34बजे

रात्रि प्रथम प्रहर पूजा:15फरवरी, शाम 6:11बजे से 9:23बजे तक

रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा:15-16फरवरी, रात 9:23बजे से 12:35बजे तक

रात्रि तृतीय प्रहर पूजा:16फरवरी, रात 12:35बजे से 3:47बजे तक

रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा:16फरवरी, सुबह 3:47बजे से 6:59बजे तक

निशीथ काल पूजा :16फरवरी 2026, रात 12:09बजे से 1:01बजे तक (लगभग 51-52मिनट)

व्रत पारण समय:16फरवरी, सुबह 6:59बजे से दोपहर 3:24बजे तक

दुर्लभ ग्रह संयोग और महत्व

ज्योतिष विशेषज्ञों की मानें तो इस महाशिवरात्रि पर सूर्य, बुध और शुक्र का ट्रिग्रही योग, लक्ष्मी-नारायण योग और अन्य राजयोग बन रहे हैं। कुछ जगहों पर चार ग्रहों (सूर्य, बुध, शुक्र, राहु) का संयोग बताया जा रहा है, जो आध्यात्मिक साधना के साथ-साथ धन, पदोन्नति और जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। यह संयोग कुछ राशियों (जैसे मेष, वृषभ, सिंह आदि) के लिए विशेष रूप से फायदेमंद माना जा रहा है। शिव पुराण के अनुसार, इस रात्रि भगवान शिव ने शिवलिंग रूप में प्राकट्य किया था, इसलिए निशीथ काल में रुद्राभिषेक, बेलपत्र चढ़ाना, महामृत्युंजय मंत्र जाप और ध्यान-साधना से मोक्ष, स्वास्थ्य और मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता है।