Raghav Chaddha Quits AAP: 24 अप्रैल को आम आदमी पार्टी को तगड़ा झटका लगा। राघव चड्ढा ने AAP के 7 सांसदों के साथ पार्टी छोड़ने का ऐलान किया। अब बताया जा रहा है कि वह कभी भी भाजपा में शामिल हो सकते हैं। ये खबर अरविंद केजरीवाल के लिए बड़े झटके से कम नहीं है।
दरअसल पिछले कई दिनों से आम आदमी पार्टी और राघव चड्ढा के बीच ठनी हुई थी। जिसका नतीजा हुआ कि राघव चड्ढा ने गंभीर आरोप लगाते हुए AAP को अलविदा कह दिया। ऐसे में ये जानना जरूरी है कि आखिरकार राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के बीच विवाद की शुरुआत कैसी हुई।
AAP-राघव में कैसे हुआ विवाद
दरअसल, अप्रैल की शुरुआत में ही AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा के उपनेता के पद से हटा दिया। उनकी जगह अशोक मित्तल को राज्यसभा में डिप्टी लीडर बनाया गया था। जिसके बाद राघव चड्ढा ने कहा था कि उन्हें खामोश कराया गया है लेकिन, वह हार नहीं हैं। राघव ने कहा था कि मुझे जब-जब मौका मिलता है, तो संसद में जनता के मुद्दे उठाता हूं। मगर क्या जनता के मुद्दे उठाना अपराध है, क्या मैंने कोई गुनाह कर दिया है। मैं तो देश की बात करता हूं। उन्होंने कहा था कि मेरे मुद्दों से देश के आम आदमी को फायदा तो हुआ लेकिन, आम आमदी पार्टी को क्या नुकसान हुआ।
AAP ने लगाए थे गंभीर आरोप
डिप्टी लीडर के पद से हटाए जाने के बाद AAP ने राघव चड्ढा पर गंभीर आरोप लगाए थे। अनुराग ढांडा ने कटाक्ष करते हुए कहा था कि संसद में पार्टी को बोलने के लिए जो समय दिया जाता है वह देश के मुद्दे उठाने के लिए, न की एयरपोर्ट पर समोसे सस्ते करवाने के लिए। उन्होंने कहा था कि कहा कि हम केजरीवाल के सिपाही हैं। निडरता पहचान है हमारी। पश्चिम बंगाल में वोट का अधिकार छीना जा रहा है। सदन में चुनाव आयोग का प्रस्ताव आया तो, भाई साहब ने बोलने से मना कर दिया। ढांडा ने कहा था कि गुजरात में हमारे सैकड़ों कार्यकर्ता को पुलिस ने गिरफ्तार किया, क्या उन्होंने संसद में कुछ कहा।