Setback for Pawan Khera From SC: सुप्रीम कोर्ट से पवन खेड़ा को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें उन्हें अंतरिम जमानत दी गई थी। यह मामला मानहानी से जुड़ा हुआ है।
असम के मुख्यमंत्री हिमंता विस्व सरमा की पत्नी रिनीकी भुइंया ने पवन खेड़ा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। जिसके बाद असम पुलिस की टीम ने पवन खेड़ा के आवास पर छापेमारी की थी। हालांकि, पवन उस वक्त पवन खेड़ा अपने घर पर नहीं थे। उन्होंने अंतरिम जमानत के लिए तेलंगाना हाईकोर्ट का रुख किया था।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ
मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस अतुल एस चंदुरकर और जस्टिस जे के माहेश्वरी ने तेलंगाना हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि अगर पवन खेड़ा असम की किसी अदालत में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दाखिल करते हैं, तो सुप्रीम कोर्ट के इस रोक वाले आदेश का उस अर्जी पर कोई बुरा असर नहीं होगा। वहीं, असम सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें रखीं। उन्होंने तेलंगाना कहा कि ये मामला तेलंगाना हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में कैसे बनता है। हाईकोर्ट ने इस बात को भी नजरअंदाज किया कि मामले में 10 साल की सजा का प्रावधान है।
आधार कार्ड से खुली पोल
सुनवाई के दौरान पीठ को बताया गया कि पवन खेड़ा ने तेलंगाना हाईकोर्ट में याचिका दायर करने के लिए अपनी पत्नी का आधार कार्ड पेश किया था। ताकी दर्शाया जा सके कि वह तेलंगाना के निवासी हैं और वहां के हाईकोर्ट का अधिकार का क्षेत्र बनता है। इसका तुषार मेहता ने कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड से पता चलता है कि उनकी पत्नी दिल्ली में रहती हैं। कोई व्यक्ति अगर अलग-अलग राज्यों में 10 संपत्तियां खरीद लेता, तो क्या इसे कानून माना जाएगा। यह अपनी सुविधानुसार कोर्ट चुनने का मामला है और कानून का खुला दुरुपयोग है। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के फैसले पर हैरानी जताई है।