Bhojshala First Friday: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने 15 मई को धार भोजशाला को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। कोर्ट ने भोजशाला-कमाल मौला परिसर को देवी वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर घोषित कर दिया था। जिसके बाद आज पहला शुक्रवार है। हिंदू संगठनों ने आज हवन, पूजन और महाआरती का विशेष आयोजन किया है, जिसे देखते हुए पूरे परिसर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। सुबह से ही हिंदू पक्ष के लोगों का भोजशाला पहुंचना शुरू हो गया है। बता दें, ये 721 साल बाद पहला ऐसा शुक्रवार है, जब परिसर में हिंदुओं की एंट्री हुई और महाआरती हो रही है।
हवन-पूजन और महाआरती का कार्यक्रम
हिंदू संगठनों ने आज भोजशाला में दिन भर हवन-पूजन का कार्यक्रम आयोजित किया है। जिसके बाद शाम को महाआरती होगी। भोज उत्सव समिति के संरक्षक अशोक जैन ने बताया कि सभी श्रद्धालु दोपहर में धानमंडी चौराहे पर एकत्र होंगे और वहां से जुलूस के रूप में भोजशाला पहुंचकर पूजा-अर्चना करेंगे।
इस आयोजन को देखते हुए प्रशासन ने किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए धार शहर को छावनी में तब्दील कर दिया है। जानकारी के अनुसार, परिसर के आसपास 2200 से ज्यादा पुलिसकर्मी, CRPF और SAF के जवान तैनात किए गए हैं। इसके अलावा ड्रोन और CCTV से निगरानी की जा रही है। इसी के साथ जिला प्रशासन ने दोनों समुदायों से शांति और सद्भाव बनाए रखने की अपील की
HC ने सुनाया था ऐतिहासिक फैसला
बता दें, मध्य प्रदेश के धार में भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर का मामला दशकों पुराना है। इस मामले में मुस्लिम पक्ष का कहना था कि वह पूरा परिसर उनका है। लेकिन हाई कोर्ट ने अपने फैसले में जगह को देवी वाग्देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर माना। जिसके बादमुस्लिम पक्ष ने इस फैसले को चुनौती दी।
वहीं, 15 मई को दिए गए 242 पन्नों के फैसले में हाईकोर्ट ने भोजशाला को 11वीं शताब्दी के परमार काल के राजा भोज द्वारा निर्मित वाग्देवी मंदिर करार दिया। इसी के साथ कोर्ट ने 2003 के उस आदेश को भी रद्द कर दिया था, जिसमें हिंदुओं को मंगलवार को पूजा और मुसलमानों को शुक्रवार को नमाज की अनुमति थी।