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मैंने फर्जी डिग्री और... CJI जस्टिस सूर्यकांत ने 'कॉकरोच' वाले बयान पर दी सफाई

Parth Jha | 16 May, 2026

CJI Justice Surya kant: सुप्रीम कोर्ट के CJI जस्टिस सूर्यकांत ने हाल ही में दिए अपने 'कॉकरोच' वाले बयान को लेकर चर्चा में बने हुए हैं। इसके बाद सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया, अब उन्होंने सफाई दी है।

CJI ने स्पष्ट किया है कि मेरे बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है। कुछ मीडिया वालों ने इसे अलग एंगल से दिखाया. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी उन लोगों के लिए थी जो फर्जी डिग्री के सहारे वकालत जैसे पेशों में आ जाते हैं।

जस्टिस सूर्यकांत ने दी सफाई

सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने कॉकरोच वाले बयान पर सफाई देते हुए कहा कि मेरी टिप्पणी फर्जी डिग्री लेकर वकालत जैसे फिल्ड में आए युवाओँ के लिए थी न कि सभी बेरोजगार युवाओं के लिए। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग मीडिया, सोशल मीडिया और अन्य क्षेत्रों में भी घुसपैठ कर रहे हैं और समाज के लिए परजीवी की तरह हैं।

युवाओं को बताया देश की ताकत

CJI ने कहा कि भारत के युवा देश की सबसे बड़ी ताकत हैं और विकसित भारत की नींव भी। उन्होंने कहा कि उन्हें देश के युवाओं पर गर्व है और युवा भी उन्हें सम्मान देते हैं।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में एक वकील की सीनियर एडवोकेट बनाए जाने की मांग से जुड़ी याचिका पर सुनवाई हो रही थी। इस दौरान CJI जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने याचिकाकर्ता के व्यवहार पर नाराजगी जताई।

बेंच ने कहा कि सीनियर एडवोकेट का दर्जा सम्मान के तौर पर दिया जाता है, इसे आक्रामक तरीके से मांगना सही नहीं है। कोर्ट ने वकील की फेसबुक पोस्ट और पेशेवर आचरण पर भी सवाल उठाए।

“अगर दर्जा मिला तो रद्द कर देंगे”

सुनवाई के दौरान CJI ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर दिल्ली हाईकोर्ट ने ऐसे व्यक्ति को सीनियर एडवोकेट बना दिया, तो सुप्रीम कोर्ट उस फैसले को रद्द कर सकता है।

उन्होंने सोशल मीडिया पर सिस्टम को निशाना बनाने वालों का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ लोग बिना किसी मजबूत पेशे के अलग-अलग माध्यमों से लगातार संस्थाओं पर हमला करते रहते हैं।

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फर्जी डिग्रियों पर भी जताई चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान कई वकीलों की डिग्रियों की सत्यता पर भी सवाल उठाए। CJI ने कहा कि अदालत इस मामले में CBI से जांच कराने पर विचार कर रही है क्योंकि कई डिग्रियों के असली होने पर संदेह है। कोर्ट ने यह भी कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया इस मुद्दे पर कार्रवाई करने से बचता है क्योंकि उसे वोटों की चिंता रहती है।

आखिर में याचिका वापस

कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद याचिकाकर्ता वकील ने माफी मांगी और अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका वापस लेने की इजाजत दे दी।