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Haryana: हरियाणा के 600 निजी अस्पताल 5 जून से हड़ताल पर, जानें क्या है वजह

Parth Jha | 01 Jun, 2026

Haryana News: आयुष्मान भारत और चिरायु हरियाणा स्वास्थ्य योजनाओं के तहत लंबित भुगतानों, कम पैकेज दरों और बढ़ती प्रशासनिक जटिलताओं को लेकर हरियाणा में निजी अस्पतालों और सरकार के बीच विवाद गहराता जा रहा है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन हरियाणा के आह्वान पर प्रदेश के लगभग 600 निजी अस्पतालों ने 5 जून से हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है।

निजी अस्पतालों का आरोप है कि राज्यभर में 400 करोड़ रुपये से अधिक के भुगतान विभिन्न स्तरों पर लंबित हैं। अस्पताल संचालकों का कहना है कि कई दावों का भुगतान महीनों से अटका हुआ है, जिससे वित्तीय दबाव लगातार बढ़ रहा है।

रोहतक में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान आईएमए पदाधिकारियों और चिकित्सकों ने कहा कि समय पर भुगतान न मिलने तथा क्लेम राशि में भारी कटौतियों के कारण योजना के तहत गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना मुश्किल होता जा रहा है। उनका कहना है कि अस्पतालों द्वारा मरीजों का सफल उपचार किए जाने के बावजूद भुगतान प्रक्रिया में अनावश्यक देरी की जाती है। कई मामलों में क्लेम स्वीकृत होने के बाद भी राशि जारी नहीं की जाती।

चिकित्सकों ने बताया कि स्वास्थ्य योजनाओं के तहत निर्धारित पैकेज दरें पहले से ही उपचार की वास्तविक लागत से कम हैं। वहीं दवाइयों, चिकित्सा उपकरणों और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ रहा है, जिससे अस्पतालों के लिए आर्थिक संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

आईएमए के अनुसार केवल रोहतक जिले में ही आयुष्मान भारत योजना से जुड़े अस्पतालों के लगभग 40 से 50 करोड़ रुपये के भुगतान लंबित हैं। संगठन का कहना है कि लगातार बढ़ती प्रशासनिक प्रक्रियाओं और भुगतान संबंधी समस्याओं के कारण बड़े अस्पतालों और वरिष्ठ विशेषज्ञ चिकित्सकों का इन योजनाओं से विश्वास कम हो रहा है।

आईएमए पदाधिकारियों ने बताया कि पिछले दो वर्षों के दौरान सरकार और संबंधित अधिकारियों के समक्ष कई बार समस्याएं उठाई गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है। ऐसे में चिकित्सक समुदाय ने आंदोलन का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया है।

आईएमए रोहतक सिटी ब्रांच के अध्यक्ष डॉ. अमित मान ने कहा कि यदि समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों के पास अब आंदोलन के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचा है।