Indian Photographer Raghu Rai Passes Away: भारतीय फोटो पत्रकारिता के स्तंभ रघु राय का 26 अप्रैल 2026 को निधन हो गया। उन्होंने 83 वर्ष की आयु में लंबी बीमारी के बाद दिल्ली के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही फोटोग्राफी, सिनेमा, साहित्य और राजनीति जगत में गहरा शोक छा गया। कई लोग उन्हें 'भारत की आत्मा का फोटोग्राफर' कहते थे।
कौन थे रघु राय?
रघु राय का जन्म 18 दिसंबर 1942 को हुआ था। सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद 1965 में उन्होंने फोटोग्राफी शुरू की। वे मैग्नम फोटोज के सदस्य बने और हेनरी कार्तियर-ब्रेसन के संरक्षण में अपनी कला को निखारा। खास बात यह है कि उनका कैमरा आधुनिक भारत के सबसे अहम क्षणों का गवाह बना। जैसे - 1971 का बांग्लादेश युद्ध, इमरजेंसी, भोपाल गैस त्रासदी (1984), इंदिरा गांधी के अंतरंग पोर्ट्रेट तक और आम भारतीयों की रोजमर्रा की जिंदगी, उनकी छवियां आधुनिक भारत के इतिहास का जीवंत दस्तावेज बन गईं।
कैमरे के जादूगर थे रघु राय
रघु राय की भोपाल गैस त्रासदी की तस्वीरें दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। उन्होंने घटना के तुरंत बाद प्लांट पहुंचकर प्रभावित परिवारों, बच्चों और पीड़ितों की हालत को लेंस में कैद किया। सालों तक उन्होंने इस विषय पर काम जारी रखा, जिससे Greenpeace के लिए किताब Exposure: A Corporate Crime बनी। इसके अलावा इंदिरा गांधी की कई अंतरंग तस्वीरें भी उनकी देन हैं, जो उनके व्यक्तित्व को करीब से दिखाती हैं।
रघु राय के जीवन पर बनी डॉक्यूमेंट्री
रघु राय की जिंदगी और काम को समझने के लिए कई डॉक्यूमेंट्री बनी हैं। इनमें सबसे चर्चित है उनकी बेटी अवनी राय की फिल्म 'Raghu Rai: An Unframed Portrait' (2017)। यह फिल्म IDFA में प्रदर्शित हुई थी। इसमें पिता-बेटी का रिश्ता, रघु राय का संघर्ष और उनकी रचनात्मक यात्रा दिखाई गई है।
दूसरी अन्य फिल्म है 'Through a Lens Clearly: Raghu Rai’s India', जो भारत की विविधता और रघु राय के नजरिए को खूबसूरती से पेश करती है। एक और फिल्म 'Raghu Rai: Hearing Through the Eyes' उनके आंतरिक और बाहरी संसार की यात्रा दिखाती है।