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दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने स्कूलों की व्यवस्थाओं की समीक्षा, दिए अहम निर्देश

Parth Jha | 12 May, 2026

Delhi News: दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने आज सीएम श्री स्कूल, सूरजमल विहार में शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित संवाद कार्यक्रम में जिला पूर्व (ईस्ट) के ज़ोन-1 एवं ज़ोन-2 के प्रिंसिपल्स तथा हेड ऑफ स्कूल्स (HOS) के साथ  विद्यालयों में शैक्षणिक वातावरण, विद्यार्थियों की गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा, स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वच्छता, सुरक्षा तथा अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की । संवाद कार्यक्रम के दौरान शिक्षा मंत्री ने विद्यालयों में उपलब्ध आधारभूत सुविधाओं की भी समीक्षा की। उन्होंने कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों, खेल सुविधाओं, स्वच्छ पेयजल, शौचालयों तथा डिजिटल शिक्षा से संबंधित व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के निर्देश दिए ।

शिक्षा मंत्री ने ज़ोन 1 एवं 2 के हेड ऑफ स्कूल्स के साथ आयोजित संवाद कार्यक्रम में भाग लेने के लिए आईएनए (INA) से कड़कड़डूमा कोर्ट तक दिल्ली मेट्रो से यात्रा की । इसके पश्चात श्री सूद मेट्रो स्टेशन से सीएम श्री स्कूल, सूरजमल विहार तक ई-रिक्शा से पहुंचे। उन्होंने सभी प्रिंसिपल्स और हेड ऑफ स्कूल्स से संवाद एवं समन्वय के माध्यम से शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इस संवाद कार्यक्रम का उद्देश्य स्कूल स्तर पर आने वाली चुनौतियों को सीधे समझना, शिक्षकों एवं स्कूल प्रशासन के सुझाव प्राप्त करना तथा सरकारी विद्यालयों को आधुनिक, सशक्त और विद्यार्थियों के लिए अधिक अनुकूल बनाना है।

शिक्षा मंत्री  ने अधिकारियों एवं विद्यालय प्रमुखों से कहा कि दिल्ली सरकार का उद्देश्य केवल बेहतर परिणाम देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए सकारात्मक, सुरक्षित और प्रेरणादायक शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है। उन्होंने स्कूलों में अनुशासन, नियमित उपस्थिति, आधुनिक शिक्षण पद्धतियों तथा विद्यार्थियों की सहभागिता बढ़ाने पर विशेष बल दिया।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षकों, विद्यालय प्रशासन और अभिभावकों के सामूहिक प्रयास से ही विद्यार्थियों का उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है। उन्होंने विद्यालय प्रमुखों से छात्रों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने तथा नवाचार आधारित शिक्षण गतिविधियों को बढ़ावा देने की अपील भी की। शिक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने के लिए हेड ऑफ़ स्कूल, शिक्षक, वाइस प्रिंसिपल, प्रिंसिपल, प्रशासनिक अधिकारी, पेरेंट्स और अन्य सभी सहयोगी महत्वपूर्ण स्टेकहोल्डर्स हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी से नुकसान होता है, तो शिक्षा व्यवस्था में कमी पूरे समाज को प्रभावित करती है। एक शिक्षक और विशेष रूप से किसी संस्थान का नेतृत्व करने वाला व्यक्ति यदि अपनी जिम्मेदारी पूरी न निभाए, तो उसका असर पूरे समाज और आने वाली पीढ़ियों पर पड़ता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि सभी अधिकारी और शिक्षक शिक्षा सुधार के कॉमन एजेंडा को पूरी निष्ठा और प्रमाणिकता से लागू करें। उन्होंने कहा कि एक हेड ऑफ़ इंस्टिट्यूशन की प्रशासनिक जिम्मेदारी के साथ-साथ एक जिम्मेदार नागरिक और सरकारी कर्मचारी के रूप में ईमानदारी से कार्य करना भी आवश्यक है।

शिक्षा मंत्री ने ज़ोन-1 और ज़ोन-2 के बोर्ड परिणामों में उल्लेखनीय सुधार के लिए शिक्षकों और स्कूल प्रमुखों की सराहना की।  शिक्षा मंत्री ने बताया कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों के कक्षा 10वीं के परीक्षा परिणामों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। वर्ष 2024-25 में जहां परीक्षा परिणाम 94.57 प्रतिशत था, वहीं वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 98.53 प्रतिशत हो गया, जो 3.96 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। इसी प्रकार, ज़ोन-2 का परीक्षा परिणाम वर्ष 2024-25 में 89.30 प्रतिशत था, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 96.54 प्रतिशत हो गया। यह 7.24 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि है।

इसके अलावा, ज़ोन-1 में कक्षा 10वीं के 100 प्रतिशत परिणाम वाले स्कूलों की संख्या वर्ष 2024-25 में 3 थी, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 11 हो गई। वहीं, ज़ोन-2 में 100 प्रतिशत परिणाम वाले स्कूलों की संख्या वर्ष 2024-25 में 3 थी, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 18 हो गई। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों ने हमेशा देश को योग्य नागरिक, वैज्ञानिक, प्रशासनिक अधिकारी, सेना के अधिकारी और अन्य सफल पेशेवर दिए हैं।

छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को संबोधन का महत्वपूर्ण विषय बताते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान समय मानसिक तनाव का दौर है। स्कूलों को केवल शैक्षणिक परिणामों पर नहीं बल्कि विद्यार्थियों की मानसिक स्थिति, तनाव, विषाद और भावनात्मक समस्याओं की पहचान पर भी ध्यान देना होगा ।  उन्होंने स्कूल सुरक्षा पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की और कहा कि किसी भी स्कूल में कोई ‘डार्क स्पॉट’ नहीं होना चाहिए जहाँ किसी प्रकार की अप्रिय या पाशविक घटना की संभावना हो ।

सीबीएसई के नए मानकों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अब केवल इंटरनल असेसमेंट, ग्रेस मार्क्स या तकनीकी व्यवस्थाओं के आधार पर परिणाम बेहतर नहीं दिखाए जा सकेंगे। आने वाला शैक्षणिक सत्र स्कूलों की वास्तविक शैक्षणिक क्षमता, प्रबंधन और गुणवत्ता की परीक्षा होगा। इसलिए सभी स्कूलों को अभी से अपने क्वार्टरली टारगेट्स और शैक्षणिक योजनाओं को मजबूत बनाकर बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य करना चाहिए।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि नई एसएमसी (School Management Committee) गाइडलाइन्स के माध्यम से स्कूलों में कम्युनिटी इन्वॉल्वमेंट को और मजबूत किया जाएगा। उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था में अभिभावकों की भूमिका बढ़ेगी तथा एसएमसी में अभिभावक अध्यक्ष भी बनेंगे। उन्होंने कहा कि समुदाय के रिटायर्ड अधिकारी, स्वयंसेवी अभिभावक और समाज के अनुभवी लोग बच्चों की शिक्षा, व्यक्तित्व विकास तथा परिणाम सुधार में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

सूद ने कहा कि दिल्ली सरकार का लक्ष्य राजधानी के सभी 38,000 क्लासरूम्स को स्मार्ट क्लासरूम में परिवर्तित करना है। उन्होंने बताया कि वर्तमान चरण में लगभग 9,000 स्मार्ट क्लासरूम्स, 175 ICT लैब्स, 100 लैंग्वेज लैब्स तथा 100 डिजिटल लाइब्रेरीज़ विकसित की जा रही हैं।

सूद ने सभी स्कूलों को कम से कम पांच नए इनोवेटिव एक्सपेरिमेंट्स करने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि उत्कृष्ट कार्य करने वाले 100 स्कूलों का चयन कर उनकी बेस्ट प्रैक्टिसेज़ पूरे दिल्ली में साझा की जाएंगी।

उन्होंने स्कूलों में विषयों की उपलब्धता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने यह भी चिंता जताई कि कई स्कूलों में विज्ञान विषय उपलब्ध नहीं है, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बच्चों को भी मेडिकल और अन्य पेशेवर क्षेत्रों में आगे बढ़ने के अवसर मिलने चाहिए। उन्होंने कहा कि हर बच्चे को विज्ञान पढ़ने का अवसर उपलब्ध कराना सरकार और स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी है।

शिक्षा मंत्री ने विद्यालयों में बायोमेट्रिक अटेंडेंस लागू करने की दिशा में भी विचार साझा किए, जिससे नॉन-टीचिंग स्टाफ सहित सभी कर्मचारियों की उपस्थिति व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि इस विषय पर शिक्षकों और विद्यालय प्रमुखों के सुझाव आमंत्रित हैं।  उन्होंने स्कूल निरीक्षण प्रणाली को भी अधिक सहयोगात्मक और व्यवस्थित बनाने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि निरीक्षण का उद्देश्य भय का वातावरण बनाना नहीं, बल्कि विद्यालयों के दैनिक कार्यों को बेहतर ढंग से संचालित करने में सहायता करना होना चाहिए। इस संदर्भ में उन्होंने शिक्षकों और प्रधानाचार्यों से सुझाव देने का आग्रह किया।

शिक्षकों की ट्रेनिंग व्यवस्था पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि अधिकांश प्रशिक्षण शैक्षणिक सत्र के दौरान आयोजित होते हैं, जिससे पढ़ाई प्रभावित होती है। सरकार इस दिशा में विचार कर रही है कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों को चरणबद्ध तरीके से गर्मी की छुट्टियों में आयोजित किया जाए और उसका शेड्यूल पहले से घोषित किया जाए, ताकि शिक्षक अपनी योजनाएं उसी अनुसार बना सकें।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से यथासंभव मुक्त किया जाए और उन्हें मुख्य रूप से शिक्षण कार्यों में लगाया जाए। बीएलओ ड्यूटी और अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बावजूद सरकार प्रयासरत है कि विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता और उपयोग बेहतर तरीके से सुनिश्चित हो सके।

उन्होंने स्कूल परिसरों के आसपास बढ़ते ड्रग्स के खतरे पर चिंता व्यक्त करते हुए खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। स्कूल प्रमुखों से कहा गया कि वे खेल सुविधाओं, पीईटी शिक्षकों की उपलब्धता और अन्य कमियों को तुरंत चिन्हित करें तथा सुनिश्चित करें कि हर बच्चा किसी न किसी खेल से जुड़ा हो, जिससे अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा विकसित हो सके।