India New Zealand FTA 2026: भारत और न्यूजीलैंड आज सोमवार को दिल्ली के भारत मंडपम में एक ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं। यह समझौता भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड में 100% ड्यूटी-फ्री पहुंच प्रदान करेगा। इस डील को दोनों देशों के बीच व्यापार को दोगुना करने और आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाई देने वाला माना जा रहा है। मालूम हो कि दोनों देशों के बीच यह वार्ता मार्च 2025 में शुरू हुई और दिसंबर 2025 में पूरी हुई।
न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने इस समझौते को 'एक पीढ़ी में आने वाला मौका' बताया है। समझौते के तहत न्यूजीलैंड ने भारत में अगले 15 सालों में 20 अरब डॉलर (लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपये) का निजी क्षेत्र निवेश बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। यह निवेश मुख्य रूप से विनिर्माण, इंफ्रास्ट्रक्चर, सेवाओं, नवाचार और रोजगार सृजन के क्षेत्रों में आएगा। भारत की तरफ से न्यूजीलैंड निवेशकों की मदद के लिए एक विशेष ‘न्यूजीलैंड इन्वेस्टमेंट डेस्क’ भी स्थापित किया जाएगा
भारतीय निर्यातकों को मिलेंगे कई फायदे
1. 100% ड्यूटी-फ्री एक्सेस: टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग गुड्स, चमड़ा उत्पाद, ऑटो पार्ट्स और आईटी-संबंधित सेवाओं जैसे क्षेत्रों को न्यूजीलैंड के बाजार में बिना किसी टैरिफ के प्रवेश मिलेगा।
2. बाजार विस्तार: 50 लाख की आबादी वाले न्यूजीलैंड में भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ेगी, जिससे एमएसएमई और निर्यातकों को नई संभावनाएं मिलेंगी।
3. व्यापार लक्ष्य: दोनों देशों का लक्ष्य द्विपक्षीय व्यापार को पांच वर्षों में दोगुना करना है।
न्यूजीलैंड को मिलेंगे कई फायदे
इस समझौते से न्यूजीलैंड को भारत के विशाल बाज़ार तक व्यापक पहुंच मिलेगी। न्यूज़ीलैंड से आने वाली वाइन, ऊन, लकड़ी, और ताजे फल जैसे कीवी, एवोकाडो, ब्लूबेरी, कीवी, सेब, लैंब मीट, वूल, फॉरेस्ट्री प्रोडक्ट्स और मैनुका हनी पर शुल्क कम होने से भारतीय बाजारों में इनकी कीमतें कम होंगे। हालांकि, भारत ने संवेदनशील कृषि उत्पादों (डेयरी, पोल्ट्री आदि) पर सुरक्षा उपाय रखे हैं ताकि स्थानीय किसानों और उद्योग को नुकसान न पहुंचे। बता दें, भारत ने अपनी 70.03% टैरिफ लाइनों को न्यूज़ीलैंड के लिए खोल देगा।
इसके अलावा इस समझौते में प्रोफेशनल्स के लिए बेहतर वीजा और मूवमेंट की सुविधा, स्वास्थ्य सहयोग और निवेश संरक्षण के प्रावधान शामिल हैं। यह FTA न केवल व्यापार बढ़ाएगा बल्कि रोजगार सृजन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और सांस्कृतिक-सामाजिक संबंधों को भी मजबूत करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की निर्यात क्षमता बढ़ेगी और न्यूजीलैंड को 140 करोड़ भारतीय उपभोक्ताओं का विशाल बाजार मिलेगा।