WHO on Hantavirus: अटलांटिक महासागर में डच क्रूज शिप एमवी होंडियस पर हंतावायरस (Hantavirus) के मामलों ने लोगों में डर पैदा कर दिया है। इस वायरस से अभी तक 3 लोगों की मौत हो चुकी है। हंतावायरस मुख्य रूप से चूहों से फैलता है, लेकिन इस बार इसके इंसानों से इंसानों में फैलने की वजह से दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। क्योंकि यह वायरस फेफड़ों और किडनी के लिए खतरनाक है। वहीं, इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधनोम घेब्रेयसस का बयान सामने आया है। उनका कहना है कि यह महामारी का रूप नहीं लेगा और ये जन स्वास्थ्य के लिए भी कम खतरा है।
कैसे शुरु हुआ हंतावायरस का कहर?
WHO के अनुसार, हंतावायरस के अब तक कुल 8 मामले सामने आए हैं, जिनमें से 3 लोगों की मौत हो चुकी है। दरअसल, यह शिप 20 मार्च 2026 को अर्जेंटीना के उशुआइया से रवाना हुई थी। इस दौरान अप्रैल में यात्रियों में बुखार और सांस संबंधी बीमारी के लक्षण दिखे। फिलहाल, शिप टेनेरिफ के कैनरी आइलैंड्स पर है, जहां कड़े क्वारंटाइन और जांच की व्यवस्था की जा रही है। WHO ने बताया कि हंतावायरस कोरोना वायरस जैसी महामारी का रूप नहीं लेगा वैश्विक जनता के लिए फिलहाल अभी निम्न जोखिम वाला वायरस है। लेकिन ध्यान न रखने पर जानलेवा भी साबित हो सकती है।
हंतावायरस क्या है और फेफड़ों पर कैसे नुकसान पहुंचाता है?
WHO की मानें तो हंतावायरस मुख्य रूप से चूहों और अन्य कृंतकों के मूत्र, मल और लार से फैलता है। लेकिन जब ये इंसानों के संपर्क संपर्क में आता है, तो वायरस फेफड़ों के छोटे-छोटे रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। इससे फेफड़ों में तरल पदार्थ भर जाता है और सांस लेना मुश्किल हो जाता है।
हंतावायरस के लक्षण क्या है?
शुरू में इस वायरस के लक्षण फ्लू जैसे होते हैं - बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी। लेकिन समय पर पहचान न होने पर 4-10 दिनों में हालत बिगड़ती है। इश दौरान सांस फूलने, सीने में दर्द और ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। इसके अलावा यह वायरस इंसान से इंसान में तेजी से फैलता है।