Iran US Taklks Fail: अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शनिवार-रविवार को हुई उच्चस्तरीय शांति वार्ता बेनतीजा रही। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में हुई बैठकें 20 घंटे से ज्यादा चलीं, लेकिन दोनों पक्षों के बीच कोई स्थायी समझौता नहीं हो सका। वेंस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट कहा कि ईरान ने अमेरिका की दी गई 'अंतिम और सर्वश्रेष्ठ पेशकश' को स्वीकार नहीं किया।
किन मुद्दों पर हुई वार्ता?
दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच मुख्य मुद्दे ईरान का परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज जलडमरूमध्य का नियंत्रण और क्षेत्रीय सुरक्षा रहे। अमेरिका चाहता था कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की क्षमता त्याग दे, यूरेनियम संवर्धन सीमित करे और होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी के लिए पूरी तरह खोल दे। लेकिन ईरान ने इन मांगों को अस्वीकार करते हुए कहा कि अमेरिका ने अच्छी नीयत से बातचीत नहीं की। ईरानी मीडिया ने आरोप लगाया कि अमेरिका बहाने ढूंढ रहा है, जबकि अमेरिकी पक्ष का कहना है कि वे लचीले रुख के साथ गए थे लेकिन तेहरान ने कोई समझौता नहीं किया।
मालूम हो कि वार्ता से पहले दोनों देशों के बीच दो सप्ताह का युद्धविराम लागू था, जो हाल ही में मध्य पूर्व में छिड़े संघर्ष के बाद हुआ था। इस दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल परिवहन प्रभावित रहा, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता देखी गई।
जेडी वेंस का बयान और वापसी
ईरान वार्ता समाप्त होने के बाद जेडी वेंस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा दोनों देशों के बीच तीन दौर की वार्ता हुई लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला। उन्होंने बताया कि अमेरिका चाहता है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने या उससे जुड़े किसी भी कार्यक्रम को पूरी तरह छोड़ने की स्पष्ट और ठोस प्रतिबद्धता दे। लेकिन ईरान इस मुद्दे पर तैयार नहीं हुआ। इसलिए हम बिना किसी समझौते पर पहुंचे ही अमेरिका लौट रहे हैं।
जेडी वेंस ने आगे कहा 'हमने अच्छी नीयत से बातचीत की, लेकिन दुर्भाग्यवश ईरान ने हमारे प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया।' उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से पूरे समय संपर्क में रहे। अब अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल वापस वाशिंगटन लौट रहा है।
ईरान ने क्या कहा?
तो वहीं, दूसरी तरफ ईरान का रुख पूरी तरह अलग रहा। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि वार्ता की सफलता इस पर निर्भर करती है कि दूसरा पक्ष कितनी ईमानदारी और संतुलित दृष्टिकोण अपनाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पिछले 24 घंटे की चर्चा में होर्मुज जलडमरूमध्य, परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में छूट, युद्ध के मुआवजे और पूरे क्षेत्र से संघर्ष समाप्त करने जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से बात हुई।
प्रवक्ता ने अमेरिका पर अत्यधिक और गैर-वाजिब मांगें थोपने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी पक्ष ने ऐसी शर्तें रखीं जो ईरान के संप्रभु अधिकारों और क्षेत्रीय हितों के अनुकूल नहीं थीं। ईरानी पक्ष ने जोर देकर कहा कि वे बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन केवल तभी जब अमेरिका यथार्थवादी और संतुलित रुख अपनाए।
अब आगे क्या होगा?
विश्लेषकों का मानना है कि इस्लामाबाद वार्ता की असफलता युद्धविराम को और कमजोर कर सकती है। 22 अप्रैल तक चलने वाले युद्धविराम की समयसीमा नजदीक है, जिसके बाद तनाव बढ़ने की आशंका है। अमेरिका ने पहले ही संकेत दिया है कि यदि ईरान परमाणु कार्यक्रम पर सहमत नहीं होता तो सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। तो वहीं, ईरान अपने गैर-समझौता शर्तों पर अड़ा हुआ है, जिसमें फ्रोजन एसेट्स की रिहाई और लेबनान में इजरायली कार्रवाई रोकना शामिल है।