LPG Cylinder:मार्च में एलपीजी की खपत में भारी कमी दर्ज की गई है। इसकी सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट टेंशन है। जिसकी वजह से सप्लाई में रुकावटे आई है। जिससे घरेलू रसोई और कमर्शियल दोनों के यूजर्स के लिए गैस की आपूर्ति पर असर पड़ा।
मार्च में एलपीजी की खपत 2.379 मिलियन टन रही, जो पिछले साल इसी समय हुई 2.729 टन की खपत से 12.8 फीसदी कम है। बता दें कि भारत अपनी एलपीजी की जरूरतों का लगभग 60 फीसदी हिस्सा आयात करता है, जिसका ज्यादातर हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार कर आता है।
एलपीजी खपत में गिरावट
तेल मंत्रालय के पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल के अनुसार, मार्च में घरेलू परिवारों को बेचे गए एलपीजी सिलेंडरों की संख्या में 8.1 फीसदी की गिरावट हुई और आंकड़ा 2.219 टन रहा। जबकी गैर-घरेलू यूजर्स को बेचे गए सिलेडर्स की संख्या में करीब 48 फीसदी देखी गई। थोक एलपीजी की ब्रिक्री में 75.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, सरकार का दावा था कि एलपीजी की सप्लाई सामान्य है और घरेलू उपयोगकर्ता की सभी मांगे पूरी की जा रही है। इस कमी को पूरा करने के लिए सरकार ने रिफाइनरीज और कंपनियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया था।
मिडिल ईस्ट के तनाव ने बढ़ाई टेंशन
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच हुए युद्ध के कारण तेहरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया था। जिसके बाद भारत के भी कुछ गैस टैंकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंस गए थे। हालांकि, सरकार ने तत्तपरता दिखाते हुए एक-एक एलपीजी से लदे सिलेंडर को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से निकाला था। ताकी भारत में गैस आपूर्ति में कोई दिक्कत ना हो। वहीं, भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान, बांग्लादेश औ श्रीलंका में तेल संकट देखा गया था।