Success Story : आज हम आपके लिए एक सफलता की कहानी लेकर आए हैं। यह कहानी है हरियाणा के महेंद्रगढ़ के एक गाँव की बेटी, दिव्या तंवर की। अपनी कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने न केवल अपने माता-पिता के सपनों को पूरा किया, बल्कि अपने क्षेत्र का नाम भी रोशन किया। उन्होंने यह उपलब्धि अपने गाँव के एक छोटे से कमरे में पढ़ाई करते हुए हासिल की; जहाँ संसाधनों का घोर अभाव था-न कोई लैपटॉप, न फ़ोन, और न ही कोई Wi-Fi कनेक्शन और न ही उनके पास कोचिंग क्लास की भारी-भरकम फ़ीस चुकाने का कोई साधन था।
लेकिन दिव्या ने अपने स्कूल में एक SDM को देखकर तय कर लिया था कि मैं अपनी माँ के लिए वही रुतबा, शोहरत हासिल करूंगी जो एक अफसर की मां को मिलते होंगे। दिव्या ने पिता के जाने के बाद तीन बच्चों की परवरिश करने वाली मां के लिए यह सपना पूरा कर दिखाया।
दिव्या अपने इंटरव्यू में बताती हैं कि जब वह आठ नौ साल की थी तो सिर से पिता का साया उठ गया था। लेकिन मैने यूपीएससी पास करने के लिए हमेशा मेरी माँ को दिमाग में रखा की अगर में कुछ बन गई तभी इनका मां सम्मान बढ़ा पाऊँगी। दिव्या ने कहा कि जब मैं स्कूल के बाद कॉलेज गई तो UPSC का पता चला। फिर मैंने UPSC की वेबसाइट से सिलेबस देखा।
घर में रहकर तैयारी
दिव्या ने बताया कि मैंने बिना किसी की मदद लिए यूपीएससी का पूरा सिलेबस देखा, पैटर्न देखा और फिर घर के उसी एक कमरे में तैयारी तैयारी शुरू कर दी। दिव्या ने बताया की मुझे मां के साथ साथ बहन भाई ने भी बहुत ज्यादा सपोर्ट किया।
तैयार की स्ट्रेटजी
इस फील्ड में तो आसपास रिलेटिव या सीनियर कोई था नहीं। दिव्या ने तैारी के बारे में बस गूगल यूट्यूब से देखा। दिव्या बताती हैं कि 5वीं तक गांव में पढ़ी, फिर पांचवीं में नवोदय में सेलेक्शन हो गया। उसके बाद 12वीं के बाद सरकारी PG कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। फीस और किताबों के खर्च के लिए गांव के मनु स्कूल में दो तीन घंटे पढ़ाती थी।
मैंने टॉपर्स के जो इंटरव्यू देखे थे, उनकी सुझाई किताबें खरीदीं। NCERT की किताबों से तैयार की। बता दें कि दिव्या का यह दूसरा प्रयास था, UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2021 उनका पहला प्रयास था। पिछली बार उनकी 438वीं रैंक थी और उन्हें IPS रैंक मिली थी। उन्हें मणिपुर कैडर अलॉट हुआ था।
लेकिन उन्होंने IAS बनने के लिए तैयारी जारी रखी और UPSC परीक्षा 2022 के रिजल्ट में मेहनत रंग लाई जिससे उन्हें 105वीं रैंक मिली है।